देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने केंद्र सरकार की ‘अग्निवीर योजना’ को लेकर मोर्चा खोल दिया है। एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रावत ने सरकार की इस महत्वाकांक्षी सैन्य भर्ती योजना पर करारा प्रहार किया और इसे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ ‘क्रूर मजाक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि चार साल की अल्पकालिक नौकरी की व्यवस्था ने उत्तराखंड जैसे सैन्य बाहुल्य प्रदेश के युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। रावत के इस बयान ने प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
हरक सिंह के प्रहार: “युवाओं को अधर में छोड़ रही सरकार”
पूर्व मंत्री ने योजना की खामियों को गिनाते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए:
- भविष्य की अनिश्चितता: रावत ने कहा कि 18 से 21 साल की उम्र में सेना में भर्ती होने वाला युवा 25 साल की उम्र में रिटायर होकर घर वापस लौट आएगा। उन्होंने सवाल पूछा कि “चार साल बाद वह युवा क्या करेगा? क्या वह समाज में गार्ड की नौकरी करने के लिए मजबूर होगा?”
- सेना की परंपरा और मनोबल: उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय सेना की अपनी एक गौरवशाली परंपरा और ‘रेजीमेंटल’ ढांचा रहा है। चार साल की अस्थाई नौकरी से जवानों में वह जुड़ाव और समर्पण पैदा नहीं हो सकता जो एक स्थाई सैनिक में होता है।
- पेंशन और सुविधाओं की कटौती: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल बजट बचाने और पेंशन के खर्च से बचने के लिए युवाओं के सम्मान और सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है।
उत्तराखंड के संदर्भ में सैन्य गौरव का हवाला
रावत ने विशेष रूप से उत्तराखंड के युवाओं के दर्द को साझा किया:
- सैन्य धाम का अपमान: हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड को ‘सैन्य धाम’ कहा जाता है, जहाँ हर घर से एक सदस्य सेना में होता है। अग्निवीर योजना ने इस गौरवशाली परंपरा की जड़ों पर चोट की है।
- आर्थिक आधार पर चोट: पहाड़ की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सैन्य सेवाओं पर निर्भर है। स्थाई भर्ती बंद होने से युवाओं के पास अब केवल शहरों में मजदूरी करने का विकल्प बच रहा है, जिससे पलायन और बढ़ेगा।
बीजेपी को दी खुली चुनौती
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रावत ने सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कहा:
- वोट बैंक की राजनीति: “भाजपा राष्ट्रवाद का ढोल पीटती है, लेकिन जब देश के रक्षकों के हितों की बात आती है, तो वह पीछे हट जाती है। यह योजना केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाने और बेरोजगारी के आंकड़ों को छिपाने का एक तरीका है।”
युवाओं का आक्रोश: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस योजना को वापस नहीं लिया या इसमें बड़े बदलाव नहीं किए, तो आने वाले समय में देश का युवा सड़कों पर उतरकर इसका जवाब देगा।





