Tuesday, February 17, 2026

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हरकी पैड़ी की मर्यादा और परंपरा सर्वोपरि: गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर व्यापक विमर्श के बाद ही होगा निर्णय; हरिद्वार में बोले सीएम धामी

हरिद्वार: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार की पावन हरकी पैड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर एक बड़ा बयान दिया है। हरिद्वार दौरे पर पहुँचे मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील विषय पर सरकार जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाएगी। उन्होंने घोषणा की कि हरकी पैड़ी की प्राचीन मर्यादा, धार्मिक परंपराओं और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, सभी संबंधित पक्षों के साथ गहन विचार-विमर्श (विमर्श) किया जाएगा और उसके बाद ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। सीएम का यह बयान उन मांगों के बीच आया है जिनमें हरकी पैड़ी क्षेत्र को केवल हिंदुओं के लिए आरक्षित रखने की बात कही जा रही है।

मुख्यमंत्री का संबोधन: ‘देवभूमि की संस्कृति से कोई समझौता नहीं’

मुख्यमंत्री ने हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा:

  • परंपरा का सम्मान: हरकी पैड़ी विश्वभर के हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यहाँ की मर्यादा बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
  • संवाद से समाधान: उन्होंने कहा कि संत समाज, गंगा सभा और स्थानीय हितधारकों के साथ बैठक कर इस विषय के हर पहलू पर चर्चा की जाएगी।
  • संवैधानिक मर्यादा: सरकार ऐसा रास्ता निकालने का प्रयास करेगी जिससे धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान हो और प्रशासनिक व संवैधानिक व्यवस्थाएं भी सुचारू रहें।

पृष्ठभूमि: क्यों उठा गैर-हिंदुओं के प्रवेश का मुद्दा?

पिछले कुछ समय से हरिद्वार में विभिन्न हिंदू संगठनों और तीर्थ पुरोहितों द्वारा यह मांग उठाई जा रही है कि हरकी पैड़ी को ‘सनातन धर्म’ के अनुयायियों तक ही सीमित रखा जाए:

  1. नगर पालिका का पुराना नियम: धार्मिक संगठनों का तर्क है कि ब्रिटिश काल और उसके बाद की कुछ नियमावलियों में हरकी पैड़ी क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने के लिए विशिष्ट नियम थे, जिन्हें सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
  2. सुरक्षा और शुचिता: तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि आस्थाहीन व्यक्तियों के प्रवेश से घाट की मर्यादा भंग होने का खतरा रहता है, जिसे रोकने के लिए प्रवेश द्वारों पर चेकिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
  3. गंगा सभा का रुख: हरकी पैड़ी का प्रबंधन देखने वाली संस्था ‘श्री गंगा सभा’ भी लंबे समय से यहाँ की मर्यादा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियमों की पैरवी करती रही है।

प्रशासनिक सतर्कता: आगामी कुंभ और पर्वों पर नजर

आगामी स्नान पर्वों और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी इस मामले को लेकर सतर्क है:

  • पुलिस चेकिंग: वर्तमान में संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए घाटों के आसपास पुलिस चेकिंग और सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।
  • सांप्रदायिक सौहार्द: मुख्यमंत्री ने अपील की है कि इस विषय पर चर्चा के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बना रहना चाहिए और कोई भी निर्णय व्यापक जनहित में लिया जाएगा।

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