गाजियाबाद: गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में एक ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में पुलिस को एक बेहद मार्मिक और हैरान कर देने वाला सुसाइड नोट मिला है। इस नोट ने पूरी घटना के पीछे की मानसिक पीड़ा और पारिवारिक कलह की परतों को खोल कर रख दिया है। सुसाइड नोट में बच्चों ने अपनी पसंद और माता-पिता के सख्त व्यवहार का जिक्र करते हुए लिखा है कि वे ‘कोरियन कल्चर और संगीत’ के प्रति अपने लगाव के कारण अक्सर प्रताड़ित महसूस करते थे। नोट की सबसे दर्दनाक लाइन—”आपकी मार से बढ़िया हमें मौत लगेगी”—ने समाज और अभिभावकों के सामने परवरिश और संवाद की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुसाइड नोट की मुख्य बातें: क्यों टूटी जीने की उम्मीद?
पुलिस द्वारा बरामद किए गए पन्नों में बच्चों ने अपने दिल का हाल बयां किया है:
- कोरियन कल्चर से लगाव: बच्चों ने खुद को ‘कोरियन लवर’ बताते हुए लिखा कि उन्हें वहां का संगीत और संस्कृति पसंद थी। लेकिन घर में इस पसंद को लेकर उन्हें अक्सर उपहास और गुस्से का सामना करना पड़ता था।
- शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना: नोट में जिक्र है कि छोटी-छोटी बातों पर होने वाली मारपीट और डांट ने उन्हें इस कदर तोड़ दिया था कि वे अब और नहीं जीना चाहते थे। उन्होंने लिखा कि हर दिन डर के साये में जीने से बेहतर है कि एक बार में ही सब खत्म कर दिया जाए।
- भावनात्मक दूरी: बच्चों ने लिखा कि उन्हें कभी भी घर में अपनी बात रखने या समझने वाला कोई नहीं मिला, जिससे वे अकेलेपन का शिकार होते चले गए।
क्या थी पूरी घटना?
बीते दिनों गाजियाबाद के एक प्रतिष्ठित अपार्टमेंट में यह हृदयविदारक घटना घटी थी:
- सामूहिक कदम: परिवार के मुखिया, उनकी पत्नी और दो बच्चों (जिनमें एक की जान बच गई या मामला जटिल है) ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर या फंदे से लटककर जान देने की कोशिश की।
- पुलिस की जांच: शुरुआती तौर पर इसे आर्थिक तंगी का मामला माना जा रहा था, लेकिन सुसाइड नोट मिलने के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है। पुलिस अब मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी मामले की जांच कर रही है।
- उत्तरजीवी का बयान: परिवार के जीवित बचे सदस्य से पूछताछ की जा रही है ताकि उस दिन के घटनाक्रम और माता-पिता के अंतिम संवाद के बारे में सही जानकारी मिल सके।
विशेषज्ञों की राय: ‘पीढ़ी का अंतराल’ और डिजिटल दुनिया
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी इंटरनेट के जरिए वैश्विक संस्कृतियों (जैसे कोरियन पॉप या के-ड्रामा) से गहराई से जुड़ रही है। जब माता-पिता इसे समझने के बजाय सख्ती से दबाने की कोशिश करते हैं, तो बच्चों में विद्रोह या अवसाद (Depression) की भावना पैदा होने लगती है। यह मामला इसी ‘कम्युनिकेशन गैप’ का चरम परिणाम नजर आता है।
पुलिस की आगामी कार्रवाई
पुलिस विभाग ने सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि लिखावट की पुष्टि की जा सके। साथ ही, बच्चों के मोबाइल फोन और लैपटॉप को भी खंगाला जा रहा है ताकि उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों और हाल के दिनों में हुई बातचीत का पता लगाया जा सके।
“सुसाइड नोट में बच्चों का दर्द साफ झलकता है। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक विफलता की ओर इशारा करता है। हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं कि आखिर वह कौन सी आखिरी वजह थी जिसने पूरे परिवार को यह घातक कदम उठाने पर मजबूर किया।” — एडिशनल पुलिस कमिश्नर, गाजियाबाद





