नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच, भारत द्वारा एक ईरानी मालवाहक जहाज को अपने बंदरगाह पर शरण देने के फैसले ने वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ दी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक कड़ा और बेबाक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने जो कुछ भी किया, वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय आधार पर पूरी तरह ‘सही’ था और भारत अपनी विदेश नीति के फैसलों के लिए किसी अन्य देश के प्रति जवाबदेह नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
बीते दिनों ईरानी नौसेना से जुड़ा एक मालवाहक जहाज, जो तकनीकी खराबी और संभावित सुरक्षा खतरों का सामना कर रहा था, ने भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर शरण मांगी थी।
- भारत का निर्णय: भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों (Maritime Law) का पालन करते हुए जहाज को मानवीय आधार पर अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी।
- पश्चिमी देशों की नाराजगी: अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों ने इस पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि ईरान पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं और वर्तमान में वह इजरायल के साथ सीधे युद्ध में शामिल है।
जयशंकर का दो टूक जवाब: ‘भारत अपने हित और नियम जानता है’
एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच पर संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने भारत के रुख का बचाव किया:
- मानवीय कर्तव्य: जयशंकर ने तर्क दिया कि समुद्र में संकट में फंसे किसी भी जहाज की सहायता करना एक जिम्मेदार राष्ट्र का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा, “जब बात जीवन बचाने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की आती है, तो भारत कभी पीछे नहीं हटता।”
- स्वतंत्र विदेश नीति: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) पर आधारित है। भारत किसके साथ कैसे संबंध रखता है, यह पूरी तरह भारत का संप्रभु निर्णय है।
- दोहरे मानकों पर प्रहार: विदेश मंत्री ने परोक्ष रूप से उन देशों की आलोचना की जो भारत के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “हमें जो सही लगा, हमने वही किया और हम अपने इस फैसले पर कायम हैं।”
युद्ध के बीच भारत की ‘बैलेंसिंग एक्ट’
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान भारत की उस संतुलित कूटनीति का हिस्सा है जिसमें वह इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी और ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों के बीच तालमेल बिठा रहा है:
- चाबहार और कनेक्टिविटी: ईरान के साथ भारत के गहरे आर्थिक हित जुड़े हैं, विशेषकर चाबहार बंदरगाह, जो मध्य एशिया तक भारत की पहुँच का मुख्य द्वार है।
- ऊर्जा सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रहने वाले लाखों भारतीयों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।





