Sunday, November 30, 2025

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हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर रिपब्लिकन नेता के बयान पर बवाल, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ में की टिप्पणी

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिका में राजनीतिक हलकों में हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता ने हाल ही में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ (Statue of Union) के दौरान हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने हिंदू समुदाय और राजनीतिक दलों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।
नेता का विवादित बयान

रिपब्लिकन नेता ने अपने संबोधन में हनुमान जी की प्रतिमा का जिक्र करते हुए कहा कि इसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि धार्मिक प्रतीकों को सरकारी या सार्वजनिक आयोजनों में सीमित रखा जाना चाहिए। इस टिप्पणी ने धार्मिक और राजनीतिक मंच पर गर्मजोशी से बहस को जन्म दिया।
सियासी और धार्मिक प्रतिक्रिया
अमेरिकी हिंदू संगठनों ने नेता की टिप्पणी की निंदा की और इसे धार्मिक असंवेदनशीलता के रूप में देखा। कई समुदायिक नेताओं ने कहा कि हनुमान जी की प्रतिमा न केवल धार्मिक प्रतीक है बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व भी करती है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल

इस मामले ने रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी दलों के बीच भी बहस को जन्म दिया है। विपक्ष ने इसे धार्मिक असंवेदनशीलता और सांस्कृतिक संवेदनाओं की अनदेखी बताते हुए आलोचना की है। पार्टी के भीतर भी कुछ नेताओं ने टिप्पणी पर सफाई देते हुए कहा कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं थी, बल्कि सार्वजनिक समारोहों में धार्मिक प्रतीकों की उपयुक्तता को लेकर थी।
स्टैच्यू ऑफ यूनियन कार्यक्रम का महत्व
‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कार्यक्रम में अमेरिका के विभिन्न सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रतीकों को प्रदर्शित किया जाता है। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले नेताओं की टिप्पणियों का व्यापक असर होता है, खासकर जब वे धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़े हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान ने अमेरिका में धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस मामले से रिपब्लिकन पार्टी को आगामी चुनावों में हिंदू समुदाय और सांस्कृतिक संगठनों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाने की चुनौती पेश हुई है।

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