नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर राजनीतिक टकराव एक बार फिर गहरा गया है। कांग्रेस ने इस मामले में पार्टी की शीर्ष नेतृत्व पर दर्ज की गई FIR को ‘‘बदले की राजनीति’’ करार दिया है। पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की सोच के तहत जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए सरकार पर तीखा हमला किया है।
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ उठाए जा रहे कदम किसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मामले में पहले भी जांच एजेंसियां सक्रिय रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया। इसके बावजूद बार-बार नए मुकदमे और FIR दर्ज कर कांग्रेस को परेशान करने की कोशिश की जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार से सरकारी एजेंसियां लगातार विपक्षी दलों को घेरने में लगी हैं, इससे लोकतांत्रिक संस्था का संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जब भी आर्थिक मुद्दों, बेरोजगारी, महंगाई और विकास से जुड़े सवालों में घिरती है, तब विपक्ष के खिलाफ नई कार्रवाई सामने आती है, ताकि जनता का ध्यान मुद्दों से हटाया जा सके। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस किसी भी दबाव में आने वाली नहीं है और सत्य की लड़ाई संविधान के दायरे में रहकर लड़ी जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का हर कदम इस बात को दर्शाता है कि वह विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने बताया कि पार्टी पूरी तरह से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ खड़ी है और कानूनी लड़ाई मजबूती के साथ लड़ी जाएगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस मामले का उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है, न कि न्याय की तलाश।
उधर, BJP ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होना जरूरी है, चाहे आरोपी कोई भी क्यों न हो। हालांकि, विपक्ष इस दावे को राजनीतिक लक्ष्य साधने की कवायद कह रहा है।
FIR दर्ज होने के बाद इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। संसद से लेकर सड़क तक दोनों पार्टियों के बीच टकराव बढ़ सकता है। नेशनल हेराल्ड विवाद एक बार फिर भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इसके और अधिक राजनीतिक रूप लेने की संभावना जताई जा रही है।





