नई दिल्ली (24 मार्च, 2026): भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) और उसकी कंपनियों से जुड़ी बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दिखाई जा रही ‘अनिच्छा’ और ढिलाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची, और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की एक विशेष पीठ ने दोनों प्रमुख जांच एजेंसियों को इस हाई-प्रोफाइल मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी, और समयबद्ध जांच करने का सख्त निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की यह फटकार अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों की गंभीरता और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिससे देश भर में कॉर्पोरेट प्रशासन और कानून के शासन पर बहस छिड़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार: सीबीआई और ईडी की ‘अनिच्छा’ पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईडी की जांच में ढिलाई पर कड़ी टिप्पणी की और दोनों एजेंसियों को फटकार लगाई:
- जांच में ढिलाई: पीठ ने सीबीआई और ईडी द्वारा अनिल अंबानी धोखाधड़ी मामले की जांच में दिखाई जा रही धीमी गति और ‘अनिच्छा’ पर नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि यह मामला बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ा है और इसमें जनता का पैसा शामिल है, इसलिए जांच में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
- निष्पक्ष और समयबद्ध जांच: शीर्ष अदालत ने सीबीआई और ईडी को इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी, और समयबद्ध जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी राजनीतिक या कॉर्पोरेट दबाव को आड़े नहीं आने दिया जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल की दलीलें और कोर्ट का निर्देश: वित्तीय संस्थानों को सहयोग देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर किया और सभी संबंधित वित्तीय संस्थानों को ईडी को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया:
- सॉलिसिटर जनरल की दलीलें: सीबीआई और ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि दोनों एजेंसियां इस मामले की जांच में पूरी ईमानदारी से जुटी हुई हैं और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कोर्ट को जांच की प्रगति के बारे में जानकारी दी और कहा कि एजेंसियों को कुछ वित्तीय संस्थानों से सहयोग नहीं मिल रहा है।
वित्तीय संस्थानों को सहयोग: सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलों को गंभीरता से लिया और सभी संबंधित वित्तीय संस्थानों को ईडी को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग न करने वाले वित्तीय संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





