सितारगंज/ऊधमसिंह नगर: कुमाऊं क्षेत्र के महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग सितारगंज-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन (4-Lane) में तब्दील करने की कवायद शुरू हो गई है। प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दायरे में आने वाले दर्जनों गांवों की चिन्हित भूमि की खरीद-फरोख्त पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, संबंधित भूमि के रिकॉर्ड फ्रीज कर दिए गए हैं ताकि भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया में कोई तकनीकी या कानूनी अड़चन न आए। इस सड़क के चौड़ीकरण से न केवल तराई और पहाड़ों के बीच की दूरी कम होगी, बल्कि सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से भी यह मार्ग मील का पत्थर साबित होगा।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य और विस्तार
सितारगंज से टनकपुर तक का यह मार्ग वर्तमान में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव के कारण छोटा पड़ रहा है:
- कनेक्टिविटी में सुधार: यह हाईवे कुमाऊं के प्रवेश द्वार सितारगंज को सीधे सीमांत जनपद चंपावत (टनकपुर) से जोड़ता है, जो नेपाल सीमा और पूर्णागिरी धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य मार्ग है।
- फोरलेन निर्माण: सड़क को टू-लेन से बढ़ाकर फोरलेन किया जाना है, जिससे भारी वाहनों और पर्यटक बसों की आवाजाही सुगम हो सकेगी।
- आर्थिक विकास: बेहतर सड़क मार्ग से स्थानीय मंडियों और व्यापारिक केंद्रों को गति मिलेगी।
जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक: क्या है प्रशासनिक आदेश?
प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं:
- अभिलेखों का मिलान: राजस्व विभाग ने उन सभी गाटा संख्याओं (Plot Numbers) को चिन्हित कर लिया है जो प्रस्तावित सड़क के एलाइनमेंट में आ रहे हैं।
- धोखाधड़ी से बचाव: जमीन की रजिस्ट्री पर रोक इसलिए लगाई गई है ताकि मुआवजे के लालच में कोई नई खरीद-फरोख्त न हो और न ही कोई अवैध निर्माण खड़ा किया जा सके।
- धारा-3 का प्रकाशन: जल्द ही भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत धारा-3 का प्रकाशन किया जाएगा, जिसके बाद प्रभावित काश्तकारों को उनके हक का उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इन गांवों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
चौड़ीकरण की जद में सितारगंज और टनकपुर तहसील के कई ग्रामीण क्षेत्र आ रहे हैं।
- चिन्हित क्षेत्र: मुख्य रूप से हाईवे के किनारे स्थित कृषि भूमि और कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस दायरे में आएंगे।
- सर्वेक्षण कार्य: एनएचएआई (NHAI) और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने सीमांकन (Demarcation) का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। अब केवल पिलर लगाने और अंतिम गणना का कार्य शेष है।
स्थानीय निवासियों और यात्रियों को लाभ
- दुर्घटनाओं में कमी: सड़क चौड़ी होने और ब्लैक स्पॉट्स (Black Spots) खत्म होने से दुर्घटनाओं के ग्राफ में गिरावट आएगी।
- समय की बचत: वर्तमान में ट्रैफिक जाम के कारण लगने वाले समय में 30 से 40 मिनट की कमी आने की उम्मीद है।
निष्कर्ष: कुमाऊं के विकास को नई रफ्तार
सितारगंज-टनकपुर रोड का चौड़ीकरण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन ‘सशक्त उत्तराखंड’ का हिस्सा है। प्रशासनिक तत्परता को देखते हुए उम्मीद है कि भूमि अधिग्रहण का कार्य अगले कुछ महीनों में पूरा कर लिया जाएगा और निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू होगा।





