केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता अब भारत की नई ताकत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत में सहकारी समितियां अब पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, जैविक कृषि और वित्तीय समावेशन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी नवाचार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही हैं।
कार्यक्रम का विषय था: सहकारिता और सतत विकास। शाह ने बताया कि भारत में वर्ष 2025 तक 8.4 लाख से अधिक सहकारी समितियों से 32 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़ चुके होंगे। उन्होंने कहा, “ये समितियां किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ रही हैं और उत्पादकों को ब्रांडिंग, मार्केटिंग व निर्यात का लाभ दे रही हैं, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक मंच पर पहुंच बना रहे हैं।”
डिजिटल युग में सहकारिता का विस्तार
शाह ने कहा कि एआई आधारित तकनीक, एम-स्ट्राइप्स जैसे डिजिटल नवाचार सहकारी समितियों को अधिक समावेशी और पारदर्शी बना रहे हैं। उन्होंने त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025–2045 जैसे प्रयासों को इस आंदोलन को उत्तरदायी और भविष्योन्मुखी बनाने की दिशा में मील का पत्थर बताया।
सेवा, नवाचार और रोजगार का आधार
गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता अब सेवा, रोजगार और नवाचार का आधार बन चुकी है। यह मॉडल न केवल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, बल्कि समावेशी विकास को भी वैश्विक पहचान दिला रहा है।
भारतीय मॉडल की वैश्विक मिसाल
शाह ने कहा कि भारत में संचालित दुनिया की सबसे बड़ी अनाज संग्रहन योजना भी सहकारी समितियों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है। यह योजना खाद्य सुरक्षा को मजबूत करती है, साथ ही किसानों को बेहतर मूल्य और संगठित बाजार भी उपलब्ध कराती है।
अंत में उन्होंने कहा, “सहकारिता का यह भारतीय मॉडल सेवा, आत्मनिर्भरता, रोजगार और नवाचार की मजबूत नींव पर आधारित है, जिससे हर नागरिक विकास यात्रा में भागीदार भी बन रहा है और लाभार्थी भी।”





