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‘समुद्र में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं’: विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक मंच से दी चेतावनी, समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर भारत का सख्त रुख

नई दिल्ली: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रखर और स्पष्ट दृष्टिकोण को मजबूती से रखा है। जापान द्वारा आयोजित ‘एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी’ (AZEC-Plus) की महत्वपूर्ण आभासी (Virtual) बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने समुद्री व्यापारिक मार्गों पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। जयशंकर ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि वैश्विक जल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना और अराजकता फैलाना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर जोर

इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र वैश्विक ऊर्जा बाजारों में मची उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुचारू बनाए रखना था। विदेश मंत्री ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर भारत का पक्ष रखा:

  • निर्बाध व्यापारिक मार्ग: उन्होंने कहा कि भारत समुद्री व्यापार के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और निर्बाध रास्तों का पुरजोर समर्थक है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा अनिवार्य है।
  • गुंडागर्दी पर प्रहार: समुद्री लुटेरों या विद्रोही समूहों द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों को ‘गुंडागर्दी’ करार देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा संकट को और अधिक गहरा करती हैं।
  • बाधाओं के खिलाफ एकजुटता: उन्होंने मित्र देशों और भागीदारों से आह्वान किया कि वे आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए साझा प्रयास करें।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धमक

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान उन क्षेत्रों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है जहाँ हाल के महीनों में व्यापारिक जहाजों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया गया है। AZEC-Plus बैठक में भारत की इस सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति सजग है, बल्कि वह वैश्विक शांति और व्यापारिक नियमों की रक्षा के लिए भी एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में खड़ा है।

एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी (AZEC) का महत्व

जापान की पहल पर शुरू हुआ यह मंच एशिया में कार्बन उत्सर्जन कम करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। जयशंकर ने बैठक में दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कूटनीतिक और सुरक्षात्मक कदम उठाता रहेगा।

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