नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों में इतिहास रचते हुए पहली बार थलसेना, वायुसेना और नौसेना की दस महिला अधिकारी समुद्री मार्ग से विश्व भ्रमण के लिए रवाना हुई हैं। यह दल भारतीय नौसेना के विशेष रूप से तैयार जहाज पर सवार होकर इस साहसिक मिशन की शुरुआत कर चुका है। इस अभियान का उद्देश्य है—भारतीय महिला शक्ति की क्षमता और नेतृत्व को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना।
इतिहास का नया अध्याय
अब तक भारतीय नौसेना की महिला अधिकारियों ने अकेले या छोटे दल में लंबी समुद्री यात्राएं की हैं। लेकिन यह पहला मौका है जब तीनों सेनाओं की महिला अधिकारी एक साथ किसी विश्व परिक्रमा अभियान पर निकली हैं। इसे भारत की बदलती सोच और सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है।
यात्रा की अवधि और मार्ग
अधिकारियों के अनुसार, विश्व भ्रमण का यह मिशन लगभग 7 से 8 महीने लंबा होगा। इस दौरान जहाज 20,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय करेगा। यात्रा में हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर से होकर गुजरना शामिल है। जहाज ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फ्रांस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, जापान और कनाडा सहित कई देशों के तटों पर रुकेगा। हर पड़ाव पर यह दल न केवल भारतीय ध्वज फहराएगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण और साहस का संदेश भी देगा।
चुनौतियों से भरी होगी परिक्रमा
दल को समुद्र की ऊँची लहरों, बदलते मौसम, तूफानों और तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना होगा। लंबी दूरी और सीमित संसाधनों के बीच यह यात्रा धैर्य, आत्मबल और तकनीकी दक्षता की परीक्षा होगी। इसके लिए सभी अधिकारियों को नौवहन, आपात स्थिति प्रबंधन और समुद्री जीवन-निर्वाह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
नौसेना का अनुभव बनेगा सहारा
भारतीय नौसेना पहले ‘नाविका सागर परिक्रमा’ के जरिए महिला अधिकारियों की क्षमता साबित कर चुकी है। अब इस बार थल और वायुसेना की भागीदारी इस अभियान को और भी खास बना रही है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिशन भविष्य में और बड़ी पहलों की नींव रखेगा।
देश से मिली शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने दल को शुभकामनाएं दी हैं। आम जनता भी इस पहल को गर्व और प्रेरणा का प्रतीक मान रही है। माना जा रहा है कि यह अभियान देश की लाखों युवा बेटियों को नए सपने देखने और सशस्त्र बलों में करियर बनाने की प्रेरणा देगा।





