कोच्चि/तिरुवनंतपुरम: प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन को देखने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) की पूर्व सचिव एस. जयश्री की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े बहुचर्चित सोना चोरी मामले में जयश्री से लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसी को संदेह है कि मंदिर के स्वर्ण भंडार से हुई चोरी के तार बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग (धोखाधड़ी और अवैध धन का लेन-देन) से जुड़े हुए हैं। ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की है, जिससे इस मामले ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है।
क्या है पूरा मामला? स्वर्ण भंडार में हेराफेरी का आरोप
सबरीमाला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने और कीमती आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं की खबरें सामने आई थीं:
- गायब हुआ सोना: ऑडिट के दौरान यह पाया गया था कि मंदिर के भंडार कक्ष (Strong Room) से सोने के कई वजनदार सिक्के और अन्य आभूषण गायब हैं।
- जवाबदेही का अभाव: जांच में पाया गया कि जिस समय यह हेराफेरी हुई, उस दौरान रिकॉर्ड्स के रखरखाव में बड़ी लापरवाही बरती गई थी।
- जयश्री की भूमिका: एस. जयश्री उस समय बोर्ड में महत्वपूर्ण पद पर तैनात थीं। जांच एजेंसियों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी जानकारी के बिना इतनी बड़ी चोरी और वित्तीय हेरफेर संभव नहीं थी।
ईडी की पूछताछ: वित्तीय लेन-देन पर टिकी नजर
प्रवर्तन निदेशालय इस मामले के केवल आपराधिक पहलू की नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपे आर्थिक लाभ की भी जांच कर रहा है:
- संपत्ति की जांच: ईडी ने जयश्री और उनके करीबियों के पिछले कुछ वर्षों के बैंक खातों और अचल संपत्तियों का ब्योरा खंगाला है। एजेंसी यह देख रही है कि क्या मंदिर से गायब हुए सोने के बदले प्राप्त धन का निवेश कहीं और किया गया है।
- आमने-सामने बिठाकर पूछताछ: सूत्रों के मुताबिक, ईडी कुछ अन्य संदिग्धों और बोर्ड के कर्मचारियों द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर जयश्री से स्पष्टीकरण मांग रही है।
- डिजिटल साक्ष्य: जयश्री के कार्यकाल के दौरान के डिजिटल रिकॉर्ड्स और पत्राचार को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं की चिंता
सबरीमाला मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में इस भ्रष्टाचार के खुलासे ने श्रद्धालुओं को आहत किया है:
- टीडीबी की छवि पर दाग: बोर्ड पर पहले भी कुप्रबंधन के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ईडी की एंट्री ने इसकी साख पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।
पारदर्शिता की मांग: हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि मंदिर के स्वर्ण भंडार का नए सिरे से पूर्ण ऑडिट कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।





