भराड़ीसैंण (गैरसैंण): उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र बुधवार को भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच शुरू हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार को विभिन्न जनमुद्दों पर घेरना शुरू कर दिया, जिसमें पुलिस कांस्टेबल ग्रेड-पे का प्रकरण सबसे प्रमुख रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय से पुलिस कर्मियों की जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है, जिससे उनके मनोबल पर विपरीत असर पड़ रहा है।
सवालों के घेरे में सरकार: ग्रेड-पे पर भारी शोरशराबा
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने पुलिस कांस्टेबलों के 4600 ग्रेड-पे की मांग को जोर-शोर से उठाया:
- वादाखिलाफी का आरोप: विपक्षी दल के नेताओं ने कहा कि चुनाव से पहले और विभिन्न मौकों पर सरकार ने ग्रेड-पे विसंगति को दूर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
- सदन में नारेबाजी: जैसे ही संसदीय कार्य मंत्री ने इस मुद्दे पर जवाब देना शुरू किया, विपक्ष ने उनके स्पष्टीकरण को ‘असंतोषजनक’ बताते हुए सदन के बीचों-बीच आकर नारेबाजी शुरू कर दी।
- पुलिस परिवारों का दर्द: विधायकों ने तर्क दिया कि विषम परिस्थितियों और 24 घंटे ड्यूटी करने वाले पुलिस कर्मियों के आर्थिक हितों की रक्षा करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
सरकार का पक्ष: ‘प्रक्रियात्मक देरी, मंशा साफ’
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस कर्मियों के हितों के प्रति मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरी तरह गंभीर हैं:
- समिति की रिपोर्ट: सरकार ने बताया कि ग्रेड-पे से जुड़े तकनीकी पहलुओं के अध्ययन के लिए गठित समिति की रिपोर्ट पर विचार किया जा रहा है।
- वित्तीय आकलन: वित्त विभाग इस बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ का आकलन कर रहा है, ताकि एक स्थायी समाधान निकाला जा सके।
- अनुशासन की अपील: सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस एक अनुशासित बल है और उनकी मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
अन्य ज्वलंत मुद्दे: भर्ती घोटाला और पलायन
ग्रेड-पे के अलावा सदन में अन्य मुद्दों पर भी सरकार की घेराबंदी की गई:
- भर्ती परीक्षाएं: पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी को लेकर युवाओं के आक्रोश का मुद्दा गूंजा।
- पहाड़ से पलायन: उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए बजट में किए गए प्रावधानों पर भी बहस हुई।
- महंगाई और बेरोजगारी: विपक्ष ने आंकड़ों के जरिए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बजट केवल कागजी घोषणाओं का पुलिंदा है।





