अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि इस्राइल ने गाजा में संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई के लिए प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। उन्होंने हमास से भी इसे स्वीकार करने का आह्वान किया। ब्लिंकन ने कहा, इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ चली ढाई घंटे की बैठक काफी सकारात्मक रही। उन्होंने प्रस्ताव के आधार पर दोनों पक्षों से समझौते पर पहुंचने का आग्रह किया। हालांकि, ब्लिंकन ने ब्रिजिंग प्रस्ताव को लेकर नेतन्याहू के रुख को स्पष्ट नहीं किया है। इसमें इस्राइल की ओर से गाजा के भीतर दो रणनीतिक गलियारों पर नियंत्रण की मांग की गई है। हमास के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अन्य पेचीदा मुद्दों के बीच यह मसला गंभीर बना हुआ है। इसके चलते कई शांति वार्ताएं बाधित हो चुकी हैं। ब्लिंकन ने मीडिया से कहा, अब हमें हमास की ओर से प्रस्ताव की स्वीकृति का इंतजार है। ब्लिंकन ने पहले कहा था कि अब गाजा संघर्ष को समाप्त करने का समय आ गया है। इस प्रस्ताव के आधार पर हुए समझौते से हमास की ओर से बंधक बनाए गए लोगों को वापस लाया जाएगा। इससे गाजा में बीते 10 महीने से अधिक समय से चल रहे विनाशकारी युद्ध से फलस्तीनियों को राहत मिलेगी। पिछले सप्ताह कतर में हुई शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी। लेकिन अब इस अमेरिकी प्रस्ताव के आधार पर इस सप्ताह वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीद है। ब्लिंकन ने कहा, इस्राइल ने समझौते को स्वीकार कर लिया है। अब शांति हमास पर निर्भर है। अमेरिका, मिस्र और कतर की मदद से सभी पार्टियों को एक साथ आना होगा। उनमें प्रक्रिया को पूरा करने और प्रतिबद्धताओं लागू की समझ विकसित करनी होगी। ब्लिंकन ने सोमवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बैठक से पूर्व राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। टाइम्स ऑफ इस्राइल के अनुसार, हर्जोग ने ब्लिंकन के साथ मुलाकात के दौरान समझौता वार्ता न हो पाने के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने ईरान की धमकियों के बीच क्षेत्र में शक्ति संतुलन के प्रयासों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का आभार जताया। उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका के लिए अमेरिका, मिस्र व कतर का आभार जताते हुए वार्ता की सफलता की उम्मीद जताई। इससे पहले ब्लिंकन ने संवाददाताओं से कहा, यह एक निर्णायक क्षण है… संभवतः सबसे अच्छा। शायद बंधकों को घर वापस लाने, युद्ध विराम कराने व सभी को स्थायी शांति तथा सुरक्षा के बेहतर रास्ते पर लाने का आखिरी अवसर। बता दें कि अमेरिकी प्रस्ताव के आधार पर मिस्र में इसी हफ्ते वार्ता फिर से शुरू हो सकती है।





