नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय संसदीय इतिहास के एक नए युग की शुरुआत करते हुए घोषणा की है कि अब संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 क्षेत्रीय भाषाओं में किया जाएगा। अब तक संसद की कार्यवाही मुख्य रूप से हिंदी और अंग्रेजी में ही प्रसारित और अनूदित की जाती थी, लेकिन अब अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से देश के विभिन्न राज्यों के नागरिक अपनी मातृभाषा में सदन की बहसों को सुन और समझ सकेंगे। ओम बिरला के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य “संसद को आम जनता के और करीब लाना” है।
डिजिटल तकनीक और AI का होगा उपयोग
इतने बड़े स्तर पर अनुवाद और प्रसारण को संभव बनाने के लिए संसद सचिवालय ने विशेष तैयारी की है:
- रियल-टाइम ट्रांसलेशन: अत्याधुनिक एआई (AI) सॉफ्टवेयर और दक्ष अनुवादकों की मदद से भाषणों का वास्तविक समय (Real-time) में अनुवाद किया जाएगा।
- संसद टीवी पर बदलाव: ‘संसद टीवी’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप पर विभिन्न भाषाओं के विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे, जहाँ दर्शक अपनी पसंद की भाषा चुन सकेंगे।
- भाषाई बाधा का अंत: दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के लिए यह सेवा विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी, जहाँ हिंदी और अंग्रेजी की सीमित समझ रखने वाले लोग भी अब विधायी प्रक्रियाओं से जुड़ सकेंगे।
लोकतंत्र के सशक्तिकरण की ओर कदम
लोकसभा अध्यक्ष ने इस निर्णय के पीछे कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं:
- जन-भागीदारी: जब लोग अपनी भाषा में चर्चा सुनेंगे, तो वे संसदीय कार्यों में अधिक रुचि लेंगे और लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।
- विविधता का सम्मान: यह पहल भारत की ‘विविधता में एकता’ के मंत्र को साकार करती है और क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को संवैधानिक गरिमा प्रदान करती है।
- पारदर्शिता: जनता सीधे तौर पर देख सकेगी कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि सदन में उनके मुद्दों को किस तरह उठा रहे हैं।
कैसे काम करेगी यह व्यवस्था?
प्रसारण व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए संसद भवन में एक नया ‘लैंग्वेज इंटरप्रिटेशन सेंटर’ स्थापित किया गया है:
- बहुभाषी चैनल: संसद के डिजिटल चैनलों पर अलग-अलग ऑडियो फीड (Audio Feeds) उपलब्ध कराई जाएंगी।
- प्रशिक्षित अनुवादक: प्रत्येक सदन के लिए 22 भाषाओं के विशेषज्ञों की टीम तैनात रहेगी, जो सदन में हो रहे भाषणों की बारीकियों और भावनाओं को सटीक रूप से अनूदित करेगी।
निष्कर्ष: ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का प्रतिबिंब
ओम बिरला ने इस बदलाव को ‘न्यू इंडिया’ की संसद का प्रतिबिंब बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल संसदीय साक्षरता बढ़ेगी, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे को भी और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। अब तमिलनाडु के गांवों से लेकर असम के चाय बागानों तक, हर भारतीय अपनी भाषा में अपनी संसद की आवाज सुन सकेगा।





