नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते (Trade Deal) पर सरकार का पक्ष रखा। विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने इस डील को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया और स्पष्ट किया कि इस समझौते से देश के कृषि क्षेत्र या किसानों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं होगा। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति पर चलते हुए डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को आयात शुल्क की छूट से बाहर रखा है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहे।
“किसानों का कवच बनी सरकार”: वाणिज्य मंत्री
पीयूष गोयल ने संसद में समझौते की बारीकियों को समझाते हुए विपक्ष के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें किसानों के हितों की अनदेखी की बात कही गई थी:
- डेयरी और संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित: मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत ने अपनी ‘लाल रेखाएं’ (Red Lines) तय की थीं। डेयरी उत्पादों और कुछ विशेष अनाजों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए उन पर कोई रियायत नहीं दी गई है।
- बाजार में पहुंच: इसके विपरीत, भारतीय किसानों के उत्पादों, जैसे कि आम, अंगूर और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Processed Food) के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे अब और आसानी से खुलेंगे।
- सब्सिडी पर कोई आंच नहीं: गोयल ने साफ किया कि इस समझौते के कारण भारतीय किसानों को मिलने वाली एमएसपी (MSP) या अन्य सरकारी सब्सिडी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
संबोधन के मुख्य बिंदु: उद्योग और निवेश
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि यह डील केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक लाभ हैं:
- स्टील और एल्युमीनियम पर राहत: उन्होंने बताया कि अमेरिका द्वारा भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को हटाने पर सहमति बनी है, जिससे भारत के भारी उद्योगों को संजीवनी मिलेगी।
- रोजगार के नए अवसर: मंत्री के अनुसार, इस समझौते से अगले 5 वर्षों में विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र में लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।
- तकनीकी सहयोग: भारत को अब महत्वपूर्ण अमेरिकी क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (Critical Tech) तक आसान पहुंच मिलेगी, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देगी।
विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार का रुख
जब विपक्ष ने डेटा सुरक्षा और डिजिटल व्यापार पर सवाल उठाए, तो पीयूष गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछली सरकारों के समय हुए समझौतों में भारत के हितों को गिरवी रखा गया था, जबकि वर्तमान सरकार बराबरी के आधार पर व्यापार कर रही है। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका भारत को एक ‘वैकल्पिक ग्लोबल सप्लाई चेन’ के रूप में देख रहा है।
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर कदम
पीयूष गोयल ने अपने भाषण का समापन यह कहते हुए किया कि यह समझौता 21वीं सदी के भारत की बदलती तस्वीर है। उन्होंने सभी सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस राष्ट्रीय उपलब्धि का स्वागत करने की अपील की।
“यह समझौता दो देशों के बीच केवल व्यापार का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते आर्थिक सामर्थ्य पर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का अटूट विश्वास है। हमारे किसानों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है और हमेशा रहेगा।” — पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री





