Thursday, February 19, 2026

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संघ के शताब्दी वर्ष पर देहरादून में सरसंघचालक का आगमन: 22-23 फरवरी को प्रबुद्धजनों और पूर्व सैनिकों के साथ करेंगे सीधा संवाद

देहरादून: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आगामी 22 और 23 फरवरी को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष दौरे का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद स्थापित करना और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई ऊर्जा देना है। लंबे अंतराल के बाद हो रहे इस दौरे को लेकर संघ के स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह है। प्रवास के दौरान सरसंघचालक मुख्य रूप से दो बड़े सम्मेलनों को संबोधित करेंगे, जिनमें समाज के प्रबुद्ध वर्ग और राष्ट्र रक्षा में समर्पित पूर्व सैनिकों की सहभागिता रहेगी।

प्रवास का विस्तृत कार्यक्रम: 22 और 23 फरवरी की रूपरेखा

डॉ. मोहन भागवत के इस दो दिवसीय दौरे के कार्यक्रमों को दो मुख्य सत्रों में विभाजित किया गया है:

  • 22 फरवरी (प्रबुद्ध जन सम्मेलन): * मुख्य कार्यक्रम: प्रवास के पहले दिन डॉ. भागवत देहरादून के संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में आयोजित ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ (Intellectuals’ Conference) को संबोधित करेंगे।
    • उद्देश्य: इस गोष्ठी में शहर के चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षाविद्, अधिवक्ता और विभिन्न क्षेत्रों के अग्रणी बुद्धिजीवी शामिल होंगे। सरसंघचालक उनके साथ सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय मूल्यों जैसे विषयों पर वैचारिक चर्चा करेंगे।
  • 23 फरवरी (पूर्व सैनिक सम्मेलन):
    • मुख्य कार्यक्रम: दूसरे दिन का केंद्र बिंदु ‘पूर्व सैनिक सम्मेलन’ होगा। उत्तराखंड चूँकि सैन्य बाहुल्य प्रदेश है, इसलिए संघ इस वर्ग के साथ संवाद को विशेष महत्व दे रहा है।
    • उद्देश्य: डॉ. भागवत पूर्व सैनिकों के अनुभवों को सुनेंगे और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका व समाज में सैन्य अनुशासन के महत्व पर अपना पाथेय (मार्गदर्शन) प्रदान करेंगे।

तैयारियों का माहौल: 1000 हिंदू सम्मेलनों का लक्ष्य

सरसंघचालक के आगमन से पूर्व पूरे उत्तराखंड में संघ द्वारा व्यापक स्तर पर जन-संपर्क अभियान चलाया जा रहा है:

  1. हिंदू सम्मेलन: डॉ. भागवत के प्रवास से पूर्व प्रदेशभर में लगभग 1000 छोटे-बड़े हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि समाज के हर तबके को संघ के शताब्दी वर्ष के संदेशों से जोड़ा जा सके।
  2. शताब्दी वर्ष का संकल्प: उत्तराखंड प्रांत के प्रचार प्रमुख के अनुसार, यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के उन कार्यक्रमों का हिस्सा है जिसके तहत सरसंघचालक देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर समाज के नेतृत्वकर्ता वर्गों से मिल रहे हैं।
  3. सुरक्षा एवं व्यवस्था: देहरादून में सरसंघचालक के प्रवास के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। आयोजन स्थलों पर केवल आमंत्रित सदस्यों को ही प्रवेश दिया जाएगा।

दौरे के कूटनीतिक मायने

राजनयिक और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. भागवत का यह दौरा कई मायनों में खास है:

  • यूसीसी पर मुहर: हाल ही में डॉ. भागवत ने उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू किए गए समान नागरिक संहिता (UCC) की सराहना की है। माना जा रहा है कि वे अपने संबोधन में इस विषय पर पुनः अपनी राय रख सकते हैं।
  • पलायन और आर्थिकी: पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण पर भी सरसंघचालक का मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।

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