Sunday, March 8, 2026

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शिक्षा विभाग से गायब शासनादेश: आठ साल तक हुई शिक्षकों की पदोन्नतियां, अब कार्रवाई के आदेश

देहरादून। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में एक गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वर्ष 2001 से 2008 तक जिस शासनादेश के आधार पर हजारों शिक्षकों को तदर्थ पदोन्नति दी गई थी, वही शासनादेश अब विभागीय अभिलेखों से गायब है। इस पर मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने शिक्षा महानिदेशक और निदेशक को संबंधित कार्मिकों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ गायब आदेश को फिर से तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

RTI से सामने आया मामला

नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक निवासी पुष्पेश सांगा ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। उन्होंने वर्ष 2001 से 2008 के बीच एलटी से प्रवक्ताओं के पदों पर दी गई तदर्थ पदोन्नतियों से संबंधित शासनादेश और नियमों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। इसके साथ ही 10 अन्य बिंदुओं पर भी सूचना तलब की थी।

लेकिन विभाग की ओर से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर उन्होंने सूचना आयोग में अपील की।

निदेशालय का तर्क और आयोग की नाराजगी

सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग ने सूचना आयोग को बताया कि निदेशालय के कई बार स्थानांतरित होने के कारण संबंधित पत्रावली गायब हो गई है। इस पर मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पत्रावली उपलब्ध न होने से तदर्थ पदोन्नतियों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। चूंकि इन तदर्थ पदोन्नतियों को बाद में मौलिक पदोन्नतियों में भी बदल दिया गया था, इसलिए इस मामले की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

आदेश में क्या कहा गया

  • शिक्षा महानिदेशक और निदेशक तीन महीने के भीतर शासन को पूरी स्थिति से अवगत कराएं।
  • गायब हुई पत्रावली को पुनः तैयार किया जाए
  • जिम्मेदार कार्मिकों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • अपीलार्थी पुष्पेश सांगा इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र होंगे।

इसके साथ ही आदेश की एक प्रति एसएसपी देहरादून को भी भेजी गई है ताकि अपीलार्थी या शिक्षा विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज होने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

इस फैसले से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं और शासनादेश गायब होने की इस चूक ने हजारों शिक्षकों की पदोन्नतियों को विवादों के घेरे में ला दिया है।

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