मुंबई/नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हाल ही में लगे कथित विवादित नारों के बाद देश की राजनीति में उबाल आ गया है। इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग देश को तोड़ने की मंशा रखते हैं और ‘शरजील इमाम की औलाद’ बनकर भारत विरोधी एजेंडा चला रहे हैं, उनके इरादों को पूरी तरह कुचल दिया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, बीते दिनों जेएनयू परिसर में एक बार फिर विवादास्पद नारेबाजी का मामला सामने आया था। आरोप है कि परिसर के भीतर कुछ समूहों द्वारा देश की अखंडता को चुनौती देने वाले और विवादित चेहरों के समर्थन में नारे लगाए गए। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दक्षिणपंथी संगठनों और राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
फडणवीस का कड़ा प्रहार
एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश की एकता के साथ खिलवाड़ करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “भारत अब चुप बैठने वाला देश नहीं है। अगर जेएनयू या देश के किसी भी कोने में शरजील इमाम जैसे राष्ट्रविरोधियों की विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी, तो सरकार और कानून उनके मंसूबों को मिट्टी में मिला देंगे।” फडणवीस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ताकतें शिक्षण संस्थानों का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए कर रही हैं।
शरजील इमाम का संदर्भ
विदित हो कि शरजील इमाम वह नाम है जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान चर्चा में आया था। उस पर भड़काऊ भाषण देने और असम को भारत से अलग करने की बात कहने के आरोप में देशद्रोह का मामला चल रहा है। फडणवीस ने अपने बयान में इसी विचारधारा का उल्लेख करते हुए इसे ‘राष्ट्रविरोधी’ करार दिया।
विपक्षी प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था
फडणवीस के इस कड़े बयान के बाद विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं का कहना है कि संस्थानों में बोलने की आजादी होनी चाहिए, हालांकि किसी ने भी राष्ट्रविरोधी नारों का समर्थन नहीं किया है। दूसरी ओर, जेएनयू प्रशासन ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी है और दिल्ली पुलिस भी वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है ताकि नारेबाजी करने वालों की पहचान की जा सके।





