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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: पॉक्सो एक्ट मामले में गिरफ्तारी पर रोक; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरक्षित फैसला सुनाया

प्रयागराज (25 मार्च, 2026): उत्तर प्रदेश के धार्मिक और विधिक हलकों में आज एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगियों को एक कथित यौन शोषण मामले में बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और अन्य गंभीर धाराओं वाले मुकदमे में शंकराचार्य, उनके प्रमुख शिष्य स्वामी प्रत्यक्त चैतन्य मुकुंदानंद गिरि और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस समित गोपाल और जस्टिस सुरेंद्र सिंह-प्रथम की खंडपीठ ने बुधवार को मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद जारी किया, जिससे शंकराचार्य खेमे को बड़ी वैधानिक जीत मिली है।

मामले का विवरण: झूंसी थाने में एफआईआर और हाईकोर्ट की शरण

इस संवेदनशील मामले की पृष्ठभूमि और विधिक प्रक्रिया का विवरण इस प्रकार है:

  • निचली अदालत का आदेश: पिछले दिनों, एक स्थानीय अदालत के निर्देश पर झूंसी थाने में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद और अन्य के खिलाफ नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में पॉक्सो एक्ट जैसी कड़ी धाराएं शामिल थीं।
  • हाईकोर्ट में चुनौती: गिरफ्तारी के डर और कथित झूठे आरोपों का हवाला देते हुए, शंकराचार्य और अन्य आरोपियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और एफआईआर को रद्द करने तथा गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की थी।
  • सुरक्षित फैसला: हाईकोर्ट ने पिछले दिनों दोनों पक्षों—याचिकाकर्ताओं (शंकराचार्य) और राज्य सरकार/शिकायतकर्ता—की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया।

हाईकोर्ट का निर्णय: तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर राहत

अदालत ने अपने आदेश में गिरफ्तारी पर रोक लगाने के ठोस कारण स्पष्ट किए हैं:

  1. साक्ष्यों की समीक्षा: खंडपीठ ने मामले के तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (circumstantial evidence) का गहनता से अध्ययन किया।
  2. अंतरिम राहत: दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध सामग्रियों पर विचार करने के बाद, कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि विवेचना पूरी होने तक याचियों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया जाना न्यायसंगत है।

अगली सुनवाई तक रोक: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक पुलिस इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट (चार्जशीट या क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल नहीं कर देती, तब तक शंकराचार्य और मुकुंदानंद सहित अन्य नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

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