नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में संचालित सभी मैसेजिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए एक समान नियामकीय ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है। यह पहल व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर उठे विवाद और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ी बढ़ती चिंताओं के बाद सामने आई है। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग नियमों के बजाय एक समान मानक लागू करना है।
सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ऐसे नियमों पर काम कर रहा है जो व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक मैसेंजर, टेलीग्राम, सिग्नल और अन्य मैसेजिंग सेवाओं पर समान रूप से लागू हो सकें। सरकार का मानना है कि एकरूप नियमों से साइबर अपराध, फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मामलों पर प्रभावी निगरानी संभव होगी।
हाल ही में व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार ने कंपनी से जवाब मांगा था। सरकार को आशंका है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हुए तो इस तरह के फीचर का दुरुपयोग कर फर्जी पहचान बनाकर साइबर ठगी को बढ़ावा मिल सकता है। इसके बाद सरकार ने अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से भी उनके सुरक्षा उपायों और नीतियों की जानकारी मांगी है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी नए नियम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रस्तावित ढांचे पर विचार-विमर्श जारी है और संबंधित कंपनियों से सुझाव भी लिए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है, ताकि सभी प्लेटफॉर्म समान नियमों के तहत काम करें और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत हो।





