Thursday, March 5, 2026

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‘वैश्विक स्थिरता की धुरी बनेगा भारत-ईयू गठबंधन’: राष्ट्रपति मुर्मु ने यूरोपीय नेताओं के सम्मान में दिया भोज; द्विपक्षीय संबंधों को बताया मानवता के लिए वरदान

नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में बुधवार रात को एक भव्य राजकीय भोज (स्टेट बैंक्वेट) का आयोजन किया गया, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यूरोपीय संघ (EU) के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और सदस्य देशों के नेताओं की मेजबानी की। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक ‘मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) पर हस्ताक्षर होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस रात्रिभोज में राष्ट्रपति ने दोनों शक्तियों के बीच बढ़ते तालमेल की सराहना की। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत और ईयू के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये उभरते संबंध वैश्विक संतुलन और स्थिरता के लिए अनिवार्य हैं।

राष्ट्रपति का संबोधन: साझा मूल्यों पर जोर

भोज की शुरुआत में अपने स्वागत भाषण में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत और यूरोप के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संबंधों को याद किया।

  • लोकतंत्र के दो स्तंभ: राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ दुनिया के दो सबसे बड़े जीवंत लोकतंत्र हैं। हमारी साझेदारी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भविष्य की जरूरत: उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की अनिश्चित भू-राजनीतिक स्थिति में भारत और ईयू का साथ आना दुनिया को आर्थिक और सामरिक स्थिरता प्रदान करेगा।

बहुआयामी साझेदारी: व्यापार से लेकर जलवायु तक

राष्ट्रपति ने व्यापार समझौते को एक मील का पत्थर बताते हुए भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को रेखांकित किया:

  1. पर्यावरण संरक्षण: राष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए भारत के ‘मिशन लाइफ’ और ईयू के हरित प्रयासों के बीच समन्वय की आवश्यकता जताई।
  2. प्रौद्योगिकी और नवाचार: उन्होंने डिजिटल परिवर्तन, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही।
  3. मानवीय संबंध: राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों की आवाजाही दोनों क्षेत्रों की समृद्धि के लिए नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

राजकीय भोज में शामिल हुए प्रमुख गणमान्य

इस भव्य आयोजन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

  • सांस्कृतिक प्रस्तुति: भोज के दौरान भारतीय कलाकारों ने विविधतापूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें शास्त्रीय संगीत और नृत्य के जरिए भारत की समृद्ध विरासत की झलक पेश की गई।
  • खास व्यंजनों का संगम: मेहमानों के लिए तैयार किए गए मेन्यू में पारंपरिक भारतीय स्वादों के साथ-साथ यूरोपीय व्यंजनों का एक अनूठा संगम रखा गया, जिसमें मोटे अनाज (मिलेट्स) से बने पकवानों को विशेष स्थान दिया गया।

वैश्विक संदेश: “साझा भविष्य के लिए साझा प्रयास”

अपने भाषण के समापन में राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह गरीबी उन्मूलन और सतत विकास के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि एक ‘उभरता हुआ भारत’ और एक ‘सशक्त यूरोप’ मिलकर एक बहुध्रुवीय दुनिया में संतुलन स्थापित करेंगे।

“भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी शांतिपूर्ण और समृद्ध विश्व की आधारशिला है। हमारे व्यापारिक समझौते ने न केवल बाजारों को जोड़ा है, बल्कि हमारे साझा भविष्य के प्रति हमारे विश्वास को भी मजबूत किया है।” — द्रौपदी मुर्मु, राष्ट्रपति

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