Friday, March 6, 2026

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वैश्विक तनाव के बीच विदेश मंत्री जयशंकर की दोटूक: ‘कोई भी देश खुद को सर्वोच्च ताकत कहने का हकदार नहीं’

होबार्ट (ऑस्ट्रेलिया): दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बड़ा बयान दिया है। ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में ‘रायसीना डाउन अंडर’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अब कोई भी एक देश अकेले खुद को ‘सर्वोच्च ताकत’ (Supreme Power) होने का दावा नहीं कर सकता। उनका यह बयान चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच जारी वर्चस्व की जंग और वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलावों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बहुध्रुवीय विश्व की वकालत: ‘अब एक का राज नहीं’

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक शक्ति संतुलन पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया:

  • साझा जिम्मेदारी: जयशंकर ने कहा कि दुनिया अब उस दौर से बाहर निकल चुकी है जहाँ एक या दो देश पूरी दुनिया की नियति तय करते थे। अब वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
  • बदलती वैश्विक व्यवस्था: उन्होंने तर्क दिया कि तकनीक, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक क्षमताएं अब कई देशों के पास हैं, जिससे विश्व ‘बहुध्रुवीय’ (Multipolar) हो गया है।
  • दबदबे का अंत: बिना किसी देश का नाम लिए उन्होंने संकेत दिया कि वर्चस्व जमाने की कोशिशें अब सफल नहीं होंगी, क्योंकि हर क्षेत्र में नई शक्तियां उभर रही हैं।

वैश्विक संघर्षों पर चिंता: यूक्रेन और पश्चिम एशिया का जिक्र

जयशंकर ने मौजूदा युद्धों और तनावों के कारण वैश्विक अस्थिरता पर भी प्रकाश डाला:

  1. संघर्षों का प्रभाव: उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया (इजरायल-हमास) के संकट ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया कितनी जुड़ी हुई है। एक जगह की अशांति का असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
  2. कूटनीति ही एकमात्र रास्ता: उन्होंने दोहराया कि युद्ध के मैदान में किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। बातचीत और कूटनीति ही आज की जरूरत है।

भारत की भूमिका: ‘एक विश्वसनीय भागीदार’

सम्मेलन के दौरान जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख का भी जिक्र किया:

  • ग्लोबल साउथ की आवाज: भारत आज विकासशील देशों (Global South) की चिंताओं को प्रमुखता से उठा रहा है।
  • इंडो-पैसिफिक क्षेत्र: ऑस्ट्रेलिया के साथ संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ‘क्वाड’ (QUAD) जैसे समूह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विश्व मित्र की छवि: उन्होंने भारत को एक ऐसी शक्ति के रूप में पेश किया जो संघर्षों के बीच सेतु (Bridge) का काम कर रही है।

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