वॉशिंगटन/कोपेनहेगन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी पुरानी महत्वाकांक्षा को हवा दे दी है। हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद, व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना अब ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता’ है। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘बेतुका’ बताया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन इस दिशा में सैन्य कार्रवाई से लेकर नकद भुगतान तक के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
ग्रीनलैंड में छिपा है कौन सा ‘खजाना’?
ट्रंप की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी के पीछे सबसे बड़ा कारण वहां की बर्फीली परतों के नीचे दबा अकूत प्राकृतिक संसाधन है। जलवायु परिवर्तन के कारण पिघलती बर्फ ने इस खजाने तक पहुंचने का रास्ता साफ कर दिया है:
- दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals): ग्रीनलैंड में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की बैटरी और अत्याधुनिक हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले 23 से ज्यादा दुर्लभ खनिज मौजूद हैं।
- चीन का दबदबा तोड़ना: वर्तमान में इन खनिजों की वैश्विक आपूर्ति पर चीन का एकाधिकार है। अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाकर चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है।
- तेल और गैस के भंडार: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, ग्रीनलैंड के तटों के पास लगभग 110 अरब बैरल तेल और भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस होने का अनुमान है।
- कीमती धातुएं: यहाँ सोना, प्लैटिनम, जस्ता (Zinc), और यूरेनियम के विशाल भंडार छिपे हैं।
रणनीतिक और सुरक्षा कारण: ‘वॉचटावर’ की भूमिका
आर्थिक लाभ के अलावा, ग्रीनलैंड का भौगोलिक स्थान अमेरिका के लिए सुरक्षा कवच की तरह है:
- रूस और चीन पर नजर: ट्रंप का दावा है कि ग्रीनलैंड वर्तमान में रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है। यहाँ से अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में रूस की सैन्य गतिविधियों पर प्रभावी ढंग से लगाम लगा सकता है।
- पिटुफिक स्पेस बेस (Pituffik Space Base): यहाँ पहले से ही अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है, जो मिसाइल चेतावनी प्रणाली और अंतरिक्ष निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
- नया व्यापारिक मार्ग: बर्फ पिघलने से आर्कटिक के रास्ते नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जो एशिया और यूरोप के बीच की दूरी को हजारों किलोमीटर कम कर सकते हैं। अमेरिका इन व्यापारिक मार्गों पर अपना नियंत्रण चाहता है।
ट्रंप का ‘मास्टर प्लान’: नकद ऑफर और सैन्य धमकी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को लुभाने के लिए कई तरह की रणनीतियों पर चर्चा कर रहा है:
- प्रत्येक नागरिक को 90 लाख रुपये: खबरों के मुताबिक, अमेरिका ग्रीनलैंड के प्रत्येक निवासी (लगभग 57,000 लोग) को $10,000 से $100,000 (करीब 90 लाख रुपये) तक का नकद भुगतान करने का प्रस्ताव दे सकता है ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका में शामिल होने का समर्थन करें।
- सैन्य हस्तक्षेप का डर: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ट्रंप ग्रीनलैंड के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी एक संभावित विकल्प है।
डेनमार्क और NATO की चेतावनी
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी धमकियों को अपमानजनक बताया है। डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की, तो यह NATO (नाटो) गठबंधन के अंत की शुरुआत होगी। यूरोपीय देशों (ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी) ने भी साझा बयान जारी कर ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है।
निष्कर्ष: भू-राजनीति का नया अखाड़ा
ग्रीनलैंड अब केवल एक शांत बर्फीला द्वीप नहीं रह गया है, बल्कि 2026 की नई वैश्विक व्यवस्था में महाशक्तियों के बीच खींचतान का मुख्य केंद्र बन चुका है। ट्रंप की नजरें जहाँ इसे ‘रियल एस्टेट’ के एक बड़े सौदे और सुरक्षा किले के रूप में देख रही हैं, वहीं दुनिया इस संभावित संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय परिणामों को लेकर चिंतित है।





