नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान आज राज्यसभा में एक तरफ विपक्ष का जोरदार हंगामा और नारेबाजी देखने को मिली, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए भारत की बढ़ती वैश्विक साख का पुरजोर बखान किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया जिन संकटों से जूझ रही है, भारत उनके लिए एक ‘समाधान प्रदाता’ (Solution Provider) के रूप में उभर रहा है। हालांकि, पूरे भाषण के दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन के बीचों-बीच (वेल) आकर नारेबाजी जारी रखी, जिस पर कटाक्ष करते हुए पीएम ने कहा कि विपक्ष जितना कीचड़ उछालेगा, कमल उतना ही खिलेगा।
पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें: वैश्विक नेतृत्व पर जोर
प्रधानमंत्री ने देश की प्रगति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
- संकटमोचक भारत: पीएम ने कहा कि कोरोना काल से लेकर वर्तमान के वैश्विक संघर्षों तक, भारत ने दुनिया को दिखाया है कि आपदा को अवसर में कैसे बदला जाता है। चाहे वह ‘वैक्सीन मैत्री’ हो या आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), दुनिया अब भारत की ओर उम्मीद से देख रही है।
- अर्थव्यवस्था की मजबूती: उन्होंने दावा किया कि जब कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं डगमगा रही हैं, तब भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
- डिजिटल इंडिया की गूंज: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आज दुनिया के लिए एक केस स्टडी बन गया है और कई देश हमारी तकनीक को अपनाने के इच्छुक हैं।
हंगामे पर तीखा प्रहार: ‘एक अकेला कितनों पर भारी’
भाषण के दौरान जब विपक्ष “मोदी-अडाणी भाई-भाई” और अन्य नारेबाजी कर रहा था, तब पीएम ने सीधे तौर पर विपक्ष की एकता और उनके विरोध के तरीकों पर हमला बोला:
- हंगामे का जवाब: पीएम ने विपक्षी सांसदों की ओर इशारा करते हुए कहा, “देश देख रहा है कि एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है। नारेबाजी करने वालों के पास तर्क नहीं हैं, इसलिए वे शोर का सहारा ले रहे हैं।”
- संस्थानों का अपमान: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जनता का भरोसा उनकी सरकार के साथ अटल है।
- नेहरू-गांधी परिवार पर तंज: पीएम ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को देश की प्रगति से ज्यादा एक ‘परिवार’ की चिंता रहती है।
विपक्ष की मांग: ‘जेपीसी’ से कम कुछ मंजूर नहीं
प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान कांग्रेस, टीएमसी, और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य लगातार ‘जेईपीसी’ (JPC) की मांग कर रहे थे:
- अडाणी मुद्दे पर घेराबंदी: विपक्ष का आरोप है कि सरकार एक विशिष्ट कॉर्पोरेट समूह को फायदा पहुँचा रही है और सार्वजनिक धन को जोखिम में डाल रही है।
- सदन का बहिष्कार: भाषण के बाद कुछ विपक्षी दलों ने असंतोष जताते हुए सदन से वॉकआउट भी किया। उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री ने उनके बुनियादी सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया।
निष्कर्ष: विकसित भारत का संकल्प
हंगामे के बावजूद प्रधानमंत्री ने अपना करीब 90 मिनट का भाषण पूरा किया और अंत में देशवासियों को भरोसा दिलाया कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने का लक्ष्य उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के समाधान के लिए कड़े और बड़े फैसले लेने का सिलसिला जारी रहेगा।
“दुनिया आज अशांति के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ शांति और स्थिरता का दूत बना है। हम केवल अपनी समस्याओं का हल नहीं निकाल रहे, बल्कि दुनिया को नया रास्ता दिखा रहे हैं।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री





