वारसॉ/नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पोलैंड की राजधानी वारसॉ में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर दो टूक संदेश दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर पोलैंड जैसे देशों को आगाह किया कि वे भारत के पड़ोस में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली ताकतों को किसी भी रूप में मदद या समर्थन न दें। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है और इसे किसी भी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता। जयशंकर का यह बयान उस समय आया है जब भारत लगातार वैश्विक मंचों पर ‘क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म’ (सीमा पार आतंकवाद) का मुद्दा उठा रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद का पोषण करते हैं, उनके साथ किसी भी तरह की रियायत विश्व शांति के लिए घातक है।
जयशंकर के संबोधन के मुख्य बिंदु
विदेश मंत्री ने अपनी बात को बेहद तार्किक और कड़े शब्दों में रखा:
- दोहरा मापदंड नहीं: उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘अच्छे आतंकवादी’ और ‘बुरे आतंकवादी’ जैसा कोई भेद नहीं हो सकता। दुनिया को उन देशों की पहचान करनी होगी जो आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
- क्षेत्रीय स्थिरता: जयशंकर ने जोर देकर कहा कि दक्षिण एशिया की स्थिरता पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है और आतंकवाद को पनाह देने वाले पड़ोसी देश इस स्थिरता के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
- अंतरराष्ट्रीय उत्तरदायित्व: उन्होंने पोलैंड से अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Funding) को रोकने के लिए भारत का साथ दे।
पोलैंड के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
आतंकवाद पर कड़े रुख के साथ-साथ विदेश मंत्री ने भारत और पोलैंड के बीच सहयोग के नए रास्ते भी तलाशे:
- रक्षा और सुरक्षा: दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। जयशंकर ने कहा कि पोलैंड भारत के लिए मध्य यूरोप में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।
- व्यापार और निवेश: भारत ने पोलैंड के निवेशकों को ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रमों का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया।
- यूक्रेन संकट पर बातचीत: बैठक के दौरान यूक्रेन-रूस युद्ध के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव और शांति की बहाली के प्रयासों पर भी गहन मंथन हुआ।
कूटनीतिक संदेश के मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का पोलैंड में दिया गया यह बयान सीधे तौर पर उन देशों के लिए चेतावनी है जो पाकिस्तान के साथ सैन्य या आर्थिक संबंधों के दौरान भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करते हैं। भारत अब अपनी ‘हार्ड पावर’ और ‘सॉफ्ट पावर’ दोनों का उपयोग कर यह सुनिश्चित कर रहा है कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई भी देश तटस्थ न रहे।
एस. जयशंकर की यह यात्रा दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक कूटनीति में अपनी शर्तों पर बात करने की स्थिति में है। पोलैंड जैसे यूरोपीय देशों को दिया गया यह ‘दो टूक’ संदेश स्पष्ट करता है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में भारत और पोलैंड के संबंधों में यह बातचीत एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।





