नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के प्रयासों को एक बड़ा झटका लगता दिख रहा है। देश की प्रमुख रक्षा निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) लड़ाकू विमानों की डिलीवरी के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में संघर्ष कर रही है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, तेजस मार्क-1A (Tejas Mk1A) विमानों की डिलीवरी में हो रही लगातार देरी के कारण HAL अब पांचवीं पीढ़ी के उन्नत लड़ाकू विमान (AMCA) की वैश्विक रेस से बाहर होने के कगार पर पहुँच सकती है। वर्तमान में कंपनी के पास केवल पांच विमान ही तैयार स्थिति में हैं, जबकि वायुसेना को इनकी तत्काल आवश्यकता है।
देरी का मुख्य कारण: इंजनों की किल्लत और तकनीकी बाधाएं
विमानों के निर्माण की गति धीमी होने के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं:
- GE इंजनों की आपूर्ति में बाधा: तेजस मार्क-1A के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से मिलने वाले F404 इंजनों की आपूर्ति में भारी देरी हुई है। इंजनों के बिना विमानों का उत्पादन ठप पड़ा है।
- सप्लाई चेन का संकट: वैश्विक स्तर पर पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) प्रभावित होने से विमान के रडार और एवियोनिक्स सिस्टम के एकीकरण में समय लग रहा है।
- सॉफ्टवेयर परीक्षण: पांच तैयार विमानों के लिए भी अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट के अंतिम दौर के परीक्षणों में उम्मीद से अधिक समय लगा है।
AMCA प्रोजेक्ट पर मंडराता खतरा
HAL की वर्तमान सुस्ती का असर भारत के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) पर पड़ सकता है:
- साख पर सवाल: यदि HAL चौथी पीढ़ी के उन्नत संस्करण (तेजस Mk1A) की समय पर डिलीवरी नहीं कर पाती है, तो पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान बनाने की उसकी क्षमता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- प्राइवेट सेक्टर की एंट्री: रक्षा मंत्रालय अब पांचवीं पीढ़ी के विमानों के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ साझेदारी या उन्हें अधिक जिम्मेदारी देने पर विचार कर सकता है, जिससे HAL का एकाधिकार खत्म हो सकता है।
- वायुसेना का घटता ‘स्क्वाड्रन’ स्तर: मिग-21 जैसे पुराने विमानों के रिटायर होने के बाद वायुसेना को कम से कम 18-20 विमान प्रति वर्ष चाहिए, लेकिन HAL की मौजूदा रफ्तार इससे काफी कम है।
रक्षा मंत्रालय का कड़ा रुख
सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने डिलीवरी में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की है। HAL को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह नासिक और बेंगलुरु की अपनी प्रोडक्शन लाइनों की क्षमता बढ़ाए ताकि सालाना 16 से 24 विमानों का उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत के लिए बड़ी चुनौती
‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत तेजस को भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि HAL ने अगले छह महीनों में अपनी उत्पादन क्षमता में सुधार नहीं किया, तो भारत को अपनी वायु शक्ति बनाए रखने के लिए एक बार फिर विदेशी लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल या F-21) के आयात की ओर देखना पड़ सकता है।
“HAL को अपनी कार्यप्रणाली और उत्पादन चक्र में आमूल-चूल बदलाव करने की जरूरत है। पांचवीं पीढ़ी के विमानों की रेस बहुत कठिन है और वहां देरी के लिए कोई जगह नहीं है।” — रक्षा विशेषज्ञ





