नई दिल्ली (18 मार्च, 2026): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच भाजपा के पूर्व सांसद वरुण गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मंगलवार, 17 मार्च को वरुण गांधी ने सपरिवार (पत्नी यामिनी और बेटी अनसूया के साथ) प्रधानमंत्री आवास पर पीएम मोदी से भेंट की। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से हाशिए पर चल रहे वरुण गांधी की इस मुलाकात को उनके ‘सियासी वनवास’ के अंत और नई पारी की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
मुलाकात की खास बातें: “पितृवत स्नेह और मार्गदर्शन”
वरुण गांधी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया:
- आशीर्वाद और मार्गदर्शन: वरुण ने लिखा कि उन्हें प्रधानमंत्री से मिलकर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
- भावुक संदेश: उन्होंने पीएम मोदी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा, “आपके आभामंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है। आपसे हुई भेंट इस विश्वास को और भी दृढ़ बना देती है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।”
बंगाल कनेक्शन: क्यों उठ रहे हैं जिम्मेदारी के सवाल?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात का सीधा संबंध आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से हो सकता है:
- पारिवारिक जुड़ाव: वरुण गांधी की पत्नी यामिनी रॉय चौधरी मूल रूप से बंगाली हैं, जिससे उनका बंगाल से गहरा व्यक्तिगत जुड़ाव है।
- संगठनात्मक अनुभव: वरुण गांधी पूर्व में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और पश्चिम बंगाल के प्रभारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्हें वहां के जमीनी समीकरणों की अच्छी समझ है।
- स्टार प्रचारक की भूमिका: बंगाल में भाजपा तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कड़ी चुनौती देने के लिए हर संभव बड़े चेहरे का उपयोग करना चाहती है। वरुण गांधी की वाकपटुता और युवा छवि पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
2024 के झटके के बाद बदली दूरियां
गौरतलब है कि 2024 के आम चुनाव में भाजपा ने पीलीभीत से वरुण गांधी का टिकट काटकर जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था। पिछले कुछ वर्षों में अपनी ही सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना करने के कारण वे मुख्यधारा की राजनीति से कटे हुए नजर आ रहे थे। हालांकि, उन्होंने सुल्तानपुर में अपनी मां मेनका गांधी के लिए प्रचार जरूर किया था, लेकिन वे भाजपा के मंचों से दूर ही रहे। अब प्रधानमंत्री के साथ इस ‘सौहार्दपूर्ण’ भेंट को पुरानी कड़वाहट खत्म होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।





