Thursday, March 5, 2026

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वनाग्नि से निपटने के लिए देहरादून प्रशासन मुस्तैद: आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए 45 लाख रुपये स्वीकृत, वन विभाग हाई अलर्ट पर

देहरादून: गर्मी का सीजन शुरू होने से पहले ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वनाग्नि (जंगल की आग) की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग ने कमर कस ली है। जंगलों को धधकने से बचाने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए शासन ने 45 लाख रुपये के विशेष बजट को मंजूरी दे दी है। इस धनराशि का उपयोग मुख्य रूप से आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की खरीद और फील्ड स्टाफ को संसाधनों से लैस करने के लिए किया जाएगा। प्रशासन ने पूरे जिले में ‘फायर अलर्ट’ जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

आधुनिक संसाधनों से लैस होगी ‘फायर फाइटिंग’ टीम

स्वीकृत 45 लाख रुपये की राशि से वन विभाग उन उपकरणों की कमी को पूरा करेगा जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में आग बुझाने के लिए जरूरी हैं।

  • नई खरीद: इस बजट से आधुनिक ‘लीफ ब्लोअर’ (सूखी पत्तियों को हटाने वाली मशीन), फायर फाइटिंग सूट, पोर्टेबल स्प्रेयर और पानी ढोने के लिए विशेष कैनवास बैग खरीदे जाएंगे।
  • कम्युनिकेशन गैप होगा कम: दुर्गम इलाकों में तैनात वन प्रहरियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए वायरलेस सेट और अन्य संचार उपकरणों को भी दुरुस्त किया जाएगा।

प्रशासन की रणनीति: ‘प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर’

जिलाधिकारी देहरादून ने वन अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट किया कि आग लगने के बाद प्रतिक्रिया देने से बेहतर है कि उसे लगने ही न दिया जाए। इसके लिए त्रिस्तरीय रणनीति बनाई गई है:

  1. कंट्रोल बर्निंग: जंगलों के किनारों पर जमा सूखी पत्तियों और ज्वलनशील पदार्थों को नियंत्रित तरीके से जलाकर साफ किया जा रहा है।
  2. फायर लाइनों की सफाई: वनों के बीच बनी ‘फायर लाइनों’ को चौड़ा और साफ किया जा रहा है ताकि आग एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक तक न फैल सके।
  3. वॉच टावर और निगरानी: संवेदनशील बीटों पर बने वॉच टावरों से 24 घंटे निगरानी की जाएगी और सैटेलाइट आधारित ‘रियल टाइम अलर्ट’ सिस्टम का उपयोग होगा।

स्थानीय समुदाय का सहयोग और जागरूकता

वनाग्नि पर नियंत्रण पाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और ‘वन पंचायतों’ को भी अभियान से जोड़ा जा रहा है। प्रशासन ने गांवों में जागरूकता शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं ताकि ग्रामीण खेतों की सफाई के दौरान आग न जलाएं। आग की सूचना देने वाले ग्रामीणों के लिए प्रोत्साहन योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए सख्त नियम

देहरादून के आसपास के आरक्षित वन क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों और ट्रेकर्स पर विशेष नजर रखी जाएगी। जंगलों के भीतर कैंप फायर करने या ज्वलनशील पदार्थ ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

“45 लाख रुपये की स्वीकृति से हमारी टीमें तकनीकी रूप से मजबूत होंगी। हमारा लक्ष्य इस बार वनाग्नि से होने वाले नुकसान को शून्य पर लाना है। सभी संवेदनशील रेंजों में क्विक रिस्पांस टीमें (QRT) तैनात कर दी गई हैं।” — वरिष्ठ वन अधिकारी, देहरादून

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