झांसी/कोलकाता: भारतीय रेलवे के स्लीपर कोच वाले वंदे भारत प्रोजेक्ट ने अब रफ्तार पकड़ ली है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए मुख्य ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। इन अत्याधुनिक ट्रांसफार्मरों की पहली खेप को असेंबली के लिए कोलकाता भेजा जा रहा है, जहां ट्रेनों के कोच और इंजन को जोड़ने का काम अंतिम चरण में किया जाएगा। यह विकास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्लीपर वंदे भारत को लंबी दूरी के सफर के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसमें बिजली की खपत और सुरक्षा के मानक सामान्य ट्रेनों से कहीं अधिक ऊंचे हैं।
क्यों खास हैं ये ट्रांसफार्मर? (तकनीकी विशेषता)
BHEL द्वारा तैयार किए गए ये ट्रांसफार्मर ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं:
- हाई-स्पीड क्षमता: स्लीपर वंदे भारत को 160 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। ये ट्रांसफार्मर उच्च गति पर भी ट्रेन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को स्थिर बिजली प्रदान करने में सक्षम हैं।
- कॉम्पैक्ट और लाइटवेट: ट्रेन के नीचे (Under-slung) फिट होने के लिए इन्हें बेहद कम वजन और कम जगह घेरने वाला बनाया गया है, जिससे कोच के भीतर यात्रियों के लिए अधिक जगह उपलब्ध हो सके।
- ऊर्जा दक्षता: ये उपकरण बिजली की बर्बादी को कम करते हैं और ट्रेन को तेजी से गति पकड़ने (Acceleration) में मदद करते हैं।
कोलकाता में होगी कोच की असेंबली
BHEL और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स (Titagarh Rail Systems) के गठबंधन के तहत इन ट्रेनों का निर्माण किया जा रहा है:
- निर्माण प्रक्रिया: झांसी और बेंगलुरु स्थित BHEL की इकाइयों में बिजली के प्रमुख उपकरण (प्रोप्लशन सिस्टम) तैयार हो रहे हैं।
- कोलकाता हब: इन उपकरणों को कोलकाता भेजा जा रहा है, जहाँ टीटागढ़ रेल की फैक्ट्री में ट्रेन के कोच (Body) तैयार किए जा रहे हैं। यहीं पर ट्रांसफार्मर और मोटर्स को फिट कर ट्रेन को पटरियों पर उतारने के लिए तैयार किया जाएगा।
- अगला चरण: असेंबली के बाद, ट्रेन को परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिसमें इसके सुरक्षा मानकों और ब्रेकिंग सिस्टम की गहन जांच होगी।
यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत में रात भर की यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल देगी:
- विश्वस्तरीय सुविधाएं: इस ट्रेन में यात्रियों को सेंसर वाले शौचालय, शोर कम करने वाली तकनीक (Noise Cancellation), और आरामदायक बर्थ जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
- समय की बचत: तेज रफ्तार और आधुनिक तकनीक के कारण दिल्ली-मुंबई या दिल्ली-कोलकाता जैसे रूटों पर यात्रा का समय वर्तमान राजधानी एक्सप्रेस की तुलना में काफी कम हो जाएगा।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
रेल मंत्रालय का लक्ष्य है कि 2026 के मध्य तक पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को देश की पटरियों पर व्यावसायिक रूप से दौड़ाया जाए। BHEL द्वारा ट्रांसफार्मरों की समय पर सप्लाई इस लक्ष्य को पाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल रेलवे की छवि बदलेगा, बल्कि भारी उद्योग क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को भी साबित करेगा।





