लोकसभा में मंगलवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर भारत वास्तव में “विश्वगुरु” है, जैसा कि सरकार दावा करती है, तो फिर बार-बार आतंकवादी हमले क्यों हो रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने ही देश के नागरिकों को निराश किया है।
कनिमोझी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करने के लिए विदेश भेजे गए संसदीय प्रतिनिधिमंडल में विपक्ष के नेताओं को भी शामिल करने के फैसले पर सरकार को धन्यवाद दिया, लेकिन इस पर तंज कसते हुए कहा कि, “हमें देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद, लेकिन अगर इन प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करने की ज़रूरत ही न पड़ती, तो हम और ज़्यादा आभारी होते।”
उन्होंने कहा कि ये दौरे किसी उत्सव का कारण नहीं हैं, बल्कि ये दर्द और असफलता की पृष्ठभूमि में हुए हैं, क्योंकि शांति स्थापित नहीं हो सकी। कनिमोझी ने कहा, “हमें जाना पड़ा क्योंकि आपने भारत के लोगों को निराश किया है। आज यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल बन चुका है। गृह मंत्री ने भी अपने भाषण में सिर्फ विपक्ष को दोष देने पर ज़ोर दिया, जबकि जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।”
डीएमके सांसद ने जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में हुए आतंकी हमलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मई 2024 में रियासी में नौ तीर्थयात्रियों की हत्या, अक्टूबर 2024 और अप्रैल 2025 में श्रीनगर और पहलगाम में हुए हमले, और पुलवामा में 240 किलो आरडीएक्स के साथ आतंकियों की मौजूदगी – ये सभी घटनाएं सरकार की विफलता को दर्शाती हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब रॉ और आईबी जैसी एजेंसियों ने आतंकी गतिविधियों की रेकी और संदिग्ध हरकतों की चेतावनी दी थी, तो सरकार ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्होंने कहा, “हर हमले के बाद यही कहा जाता है कि अब दोबारा ऐसा नहीं होगा। लेकिन क्या वाकई ‘विश्वगुरु’ ने इससे कुछ सीखा?”
कनिमोझी ने संसद की उपभोक्ता मामलों से जुड़ी स्थायी समिति की अध्यक्ष के रूप में ई-दाखिल पोर्टल पर उपभोक्ता शिकायतों की बढ़ती संख्या और समाधान दर में कमी पर भी चिंता जताई। समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि 23 प्रतिशत शिकायतों की समाधान दर चिंताजनक है और सरकार ने अब तक कोई ठोस रणनीति प्रस्तुत नहीं की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि ई-जागृति प्रणाली में सुधार और एक समर्पित निगरानी तंत्र की स्थापना आवश्यक है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज उपभोक्ता शिकायतों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके।
इस दोहरे प्रहार के साथ कनिमोझी ने न सिर्फ आतंकी हमलों पर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए, बल्कि नागरिक सेवा प्रणाली की लचर कार्यप्रणाली पर भी तीखा संदेश दिया।





