टोक्यो। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच जापान ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया है। जापानी सरकार का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और पड़ोसी देशों की आक्रामक नीतियों के मद्देनज़र देश की सुरक्षा को और सुदृढ़ करना समय की मांग है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, जापान आने वाले वर्षों में ऐसे हथियारों की तैनाती करना चाहता है जो दुश्मन के ठिकानों को दूर से ही निशाना बना सकें। यह कदम पारंपरिक रूप से शांतिवादी रक्षा नीति का पालन करने वाले जापान के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और उत्तर कोरिया की ओर से लगातार बढ़ रहे मिसाइल परीक्षणों और सैन्य गतिविधियों ने जापान की सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। इसी कारण जापानी प्रशासन ने अपने रक्षा ढांचे को और अधिक आक्रामक एवं सक्षम बनाने की दिशा में यह कदम उठाया है।
सरकार का कहना है कि मिसाइलों की तैनाती केवल रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है और इसका मकसद किसी देश पर हमला करना नहीं है। हालांकि इस फैसले से पड़ोसी देशों में खलबली मचना तय है। चीन पहले ही जापान की सैन्य नीतियों पर कड़ी आपत्ति जता चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि जापान का यह फैसला न केवल उसके सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा बल्कि अमेरिका के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को भी और गहरा करेगा। अमेरिका लंबे समय से जापान को अपनी रक्षा क्षमताओं में निवेश बढ़ाने की सलाह देता आया है।
फिलहाल, जापानी संसद और रक्षा परिषद इस नीति बदलाव पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में जापान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक और अधिक प्रभावशाली सैन्य ताकत के रूप में उभरेगा।




