Tuesday, March 3, 2026

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रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भारत का खर्च बढ़ा

नई दिल्ली। रूस से कच्चे तेल का आयात भारत के लिए लगातार बड़ी आर्थिक हिस्सेदारी बनता जा रहा है। एक यूरोपीय थिंक टैंक द्वारा जारी नवीनतम विश्लेषण के अनुसार, भारत ने केवल अक्तूबर माह में रूस से कच्चे तेल की खरीद पर लगभग ढाई अरब यूरो (2.5 बिलियन यूरो) का भुगतान किया। यह आंकड़ा भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी तेल पर बढ़ती निर्भरता का संकेत देता है।

थिंक टैंक की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद एशियाई देशों—खासकर भारत और चीन—के लिए रूसी तेल अपेक्षाकृत अधिक सस्ता और सुलभ हो गया। भारत ने इसी अवसर का लाभ उठाते हुए पिछले डेढ़ वर्ष में रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
रिपोर्ट बताती है कि रूसी तेल की छूट वाली कीमतें भारत के लिए आर्थिक रूप से आकर्षक साबित हो रही हैं, जिसके चलते आयात मात्रा भी लगातार ऊंचाई छू रही है।

हालांकि यूरोपीय थिंक टैंक की रिपोर्ट में केवल आंकड़े दिए गए हैं, भारत सरकार पूर्व में यह स्पष्ट कर चुकी है कि उसका प्राथमिक लक्ष्य देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक बाजार की अस्थिरता और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच वह उन स्रोतों से खरीद जारी रखेगी जो देश के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हों।

थिंक टैंक की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत द्वारा रूसी तेल पर बढ़ रहा खर्च अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को को वित्तीय राहत देता है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों का बड़ा लक्ष्य था। रिपोर्ट में इस प्रवृत्ति को यूरोप के लिए “चिंता का विषय” बताया गया है, क्योंकि इससे रूस के राजस्व पर पड़ने वाले प्रतिबंधों के प्रभाव को सीमित किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भी यह रुझान जारी रह सकता है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल के उच्च प्रसंस्करण मार्जिन का लाभ उठा रही हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से भारत अभी भी विविध स्रोतों की खोज कर रहा है, लेकिन रूस उसकी प्रमुख आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बना हुआ है।

यूरोपीय थिंक टैंक द्वारा जारी यह ताज़ा दावा भारतीय ऊर्जा नीति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिवेश दोनों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है।

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