कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे विनाशकारी युद्ध को आज चार साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक भावुक और रणनीतिक संबोधन देते हुए युद्ध की वर्तमान स्थिति पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों को सीधे तौर पर संदेश देते हुए कहा कि यूक्रेन को केवल नैतिक समर्थन या सहानुभूति की जरूरत नहीं है, बल्कि युद्ध जीतने के लिए तत्काल भारी गोला-बारूद और आधुनिक हथियारों की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हथियारों की कमी के कारण उनके सैनिकों को मोर्चे पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
जेलेंस्की के संबोधन के प्रमुख खुलासे
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने चार साल के संघर्ष के बाद कुछ ऐसे राज साझा किए जो अब तक पर्दे के पीछे थे:
- सैनिकों की शहादत का आंकड़ा: जेलेंस्की ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि युद्ध में अब तक यूक्रेन के हजारों वीर सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हर एक सैनिक की शहादत का हिसाब रूस को देना होगा।
- हथियारों की गंभीर कमी: उन्होंने खुलासा किया कि रूस के पास यूक्रेन की तुलना में दस गुना अधिक गोला-बारूद है। इस असंतुलन के कारण यूक्रेन को कई मोर्चों पर रणनीतिक रूप से पीछे हटना पड़ा है।
- रूस की गुप्त योजनाएं: जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन के पास रूस की भविष्य की सैन्य योजनाओं के इनपुट्स हैं, लेकिन उन्हें विफल करने के लिए पर्याप्त संसाधनों का अभाव है।
पश्चिमी देशों पर दबाव और मदद की गुहार
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में मित्र राष्ट्रों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय देशों को उनकी सुस्ती के लिए आड़े हाथों लिया:
- देरी का परिणाम: जेलेंस्की ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा मदद भेजने में की गई हर देरी का भुगतान यूक्रेनी नागरिकों को अपनी जान देकर करना पड़ रहा है।
- हवाई सुरक्षा की मांग: उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर यूक्रेन को पर्याप्त संख्या में ‘पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ और आधुनिक फाइटर जेट्स मिल जाएं, तो वे रूसी वायुसेना पर लगाम लगा सकते हैं।
- जीत का संकल्प: तमाम चुनौतियों के बावजूद जेलेंस्की ने दोहराया कि यूक्रेन अपनी एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेगा और अंतिम सांस तक अपनी संप्रभुता के लिए लड़ेगा।
युद्ध के चार साल: एक विनाशकारी सफर
24 फरवरी 2022 को शुरू हुए इस युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति को बदलकर रख दिया है:
- मानवीय त्रासदी: लाखों लोग शरणार्थी बन चुके हैं और मारियुपोल से लेकर बखमुत तक कई शहर पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो गए हैं।
- वैश्विक प्रभाव: इस युद्ध के कारण दुनिया भर में ईंधन और खाद्यान्न की कीमतों में भारी उछाल आया है।





