Tuesday, February 17, 2026

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रूसी रसायन-उर्वरक आयात पर ट्रंप का गोलमोल जवाब, भारत ने उठाए दोहरे मापदंड पर सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिका द्वारा रूस से रसायन और उर्वरक आयात किए जाने के सवाल पर प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा, “मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता। हमें इसकी जांच करनी होगी।”
यह सवाल भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई ने उस वक्त उठाया, जब ट्रंप ने हाल ही में भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी थी।
भारत ने दिया था तीखा जवाब

ट्रंप के आरोपों के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का रूस से तेल और ऊर्जा उत्पादों का आयात ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं की जरूरतों पर आधारित है, और यह “राष्ट्रीय हित में लिया गया निर्णय” है।
बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई थी, तब अमेरिका ने स्वयं भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे।
दोहरा रवैया?

भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा आवश्यकता और आर्थिक स्थिरता के लिए रूस से आयात कर रहा है, जबकि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश किसी राष्ट्रीय मजबूरी के बिना ही रूस से व्यापार कर रहे हैं।
विशेष रूप से, भारत ने यह भी उजागर किया कि अमेरिका अभी भी रूसी यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, रसायनों और उर्वरकों का आयात कर रहा है, जिनका उपयोग परमाणु ऊर्जा और कृषि क्षेत्र में किया जाता है।
ट्रंप के ताजा आरोप

ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि “भारत न केवल भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे भारी मुनाफे पर खुले बाजार में भी बेच रहा है।” उन्होंने भारत पर यह आरोप भी लगाया कि वह “रूसी युद्ध मशीन” को ईंधन प्रदान कर रहा है।
क्या है आगे की राह?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की आंतरिक चुनावी राजनीति, चीन के प्रति लचीली नीति और भारत पर कठोर रुख एक असंतुलित विदेश नीति का संकेत देते हैं। निक्की हेली जैसे वरिष्ठ अमेरिकी नेता भी ट्रंप की आलोचना कर चुके हैं और भारत को मजबूत सहयोगी बताते हुए रिश्ते न बिगाड़ने की सलाह दे चुके हैं।

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