Sunday, November 30, 2025

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रुड़की में औषधि विभाग की बड़ी कार्रवाई: सरकारी मुहर लगी अवैध दवाओं का भंडार पकड़ा गया, जांच में बड़ा नेटवर्क होने के संकेत

रुड़की।
वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती के नेतृत्व में औषधि विभाग की टीम ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी मुहर लगी अवैध दवाओं का विशाल भंडार पकड़ा है। बरामद दवाओं में राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की आपूर्ति के लिए चिह्नित दवाएं भी शामिल हैं। इन पर स्पष्ट रूप से संबंधित राज्यों की सरकारी मुहर लगी हुई थी। इस खुलासे ने विभाग को भी हैरान कर दिया है। अब यह जांच शुरू कर दी गई है कि सरकारी आपूर्ति की ये दवाएं निजी बाजार तक कैसे पहुंचीं।

गुप्त सूचना पर मारा गया छापा

विभाग को सूचना मिली थी कि ग्राम सलीयर (रुड़की) स्थित मैसर्स फलक नाज नामक प्रतिष्ठान में बिना वैध लाइसेंस के दवाओं की अवैध बिक्री की जा रही है। साथ ही यह प्रतिष्ठान आसपास के क्षेत्रों में बिना पंजीकृत चिकित्सकों (झोलाछाप डॉक्टरों) को भी दवाएं सप्लाई कर रहा था।
सूचना की पुष्टि के बाद औषधि विभाग की टीम ने मौके पर छापा मारा। निरीक्षण के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं बरामद की गईं।

सरकारी आपूर्ति की दवाएं भी मिलीं

जांच में यह सामने आया कि बरामद दवाओं में कई ऐसी थीं जो केवल सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को आपूर्ति के लिए निर्धारित थीं। इन पर राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की आधिकारिक मोहर लगी हुई थी। यह तथ्य सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कुल 12 प्रकार की दवाएं जब्त कर लीं।

मौके पर ही जप्ती मेमो (फार्म-16) और स्पॉट मेमो तैयार किया गया। सभी दवाओं को गवाहों की मौजूदगी में सीलबंद किया गया। पूछताछ में प्रतिष्ठान संचालक किसी भी वैध औषधि लाइसेंस या क्रय-विक्रय अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका।

औषधि अधिनियम के तहत कार्रवाई

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि संचालक के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक अनीता भारती ने बताया कि यह मामला अत्यंत गंभीर है क्योंकि सरकारी आपूर्ति की दवाएं आमतौर पर निःशुल्क वितरण के लिए होती हैं। उनका निजी बाजार में पाया जाना किसी बड़े अवैध नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

उन्होंने कहा कि इस मामले की गहन जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि सरकारी चैनल से बाहर ये दवाएं कैसे आईं और किन लोगों की इसमें भूमिका रही।

झोलाछाप डॉक्टरों तक सप्लाई के संकेत

औषधि निरीक्षक हरीश सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस तरह की सरकारी दवाओं की सप्लाई आसपास के क्षेत्रों में कई झोलाछाप चिकित्सकों तक की जा रही थी। विभाग अब उनसे भी पूछताछ करेगा।

टीम में औषधि निरीक्षक हरीश सिंह और मेघा भी शामिल थीं। विभाग का मानना है कि इस कार्रवाई से एक बड़े अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

इस कार्रवाई ने औषधि विभाग की कार्यशैली को मजबूती दी है और यह संकेत भी दिया है कि सरकारी दवाओं के दुरुपयोग पर अब सख्त निगरानी रखी जाएगी।

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