नई दिल्ली/ब्रुसेल्स: भारत की आर्थिक कूटनीति के लिए साल 2026 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पिछले दो दशकों से लंबित मेगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से इस समझौते को रिकॉर्ड समय में पूरा करने का निर्णय लिया है और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इसी साल (2024 के अंत तक या 2025 की शुरुआत में) इस पर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे। यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक का निर्माण करेगा, जिससे भारत की जीडीपी और वैश्विक निर्यात को जबरदस्त गति मिलने की उम्मीद है।
20 साल का गतिरोध और सफल वार्ता
भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार वार्ता पहली बार 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से 2013 में इसे रोक दिया गया था।
- नई ऊर्जा: 2022 में वार्ता फिर से शुरू हुई और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे ‘फास्ट ट्रैक’ पर डाला गया है।
- विवादास्पद मुद्दों का समाधान: डेयरी उत्पादों, शराब (वाइन्स) पर आयात शुल्क और पेशेवरों की आवाजाही जैसे जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों ने बीच का रास्ता निकाल लिया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है यह ‘मेगा डील’?
यूरोपीय संघ भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इस समझौते के लागू होने से भारत को कई सीधे लाभ होंगे:
- निर्यात में उछाल: भारतीय कपड़ा (Textiles), चमड़ा उद्योग, और रत्न-आभूषणों को ईयू के 27 देशों के बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री’ या कम शुल्क पर पहुंच मिलेगी।
- सस्ती होगी यूरोपीय तकनीक: भारत में यूरोपीय मशीनरी, परिवहन उपकरण और उच्च तकनीक वाले उत्पादों के दाम कम होंगे, जिससे घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को लाभ होगा।
- आईटी और सेवा क्षेत्र: भारतीय आईटी विशेषज्ञों और इंजीनियरों के लिए यूरोप में काम करने के नियमों में ढील मिलने की संभावना है।
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
यह समझौता न केवल आर्थिक है, बल्कि सामरिक भी है:
- सप्लाई चेन विविधीकरण: यूरोपीय कंपनियां चीन के विकल्प के रूप में भारत को अपना प्रमुख उत्पादन केंद्र (Manufacturing Hub) बनाना चाहती हैं।
- निवेश की बाढ़: इस डील के बाद यूरोपीय देशों से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह में 25-30% की वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।
अगली प्रक्रिया: अंतिम ड्राफ्ट तैयार
वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों के कानूनी विशेषज्ञों की टीमें अब समझौते के ‘लीगल ड्राफ्ट’ को अंतिम रूप दे रही हैं। इसके बाद इसे दोनों क्षेत्रों की संसदों से मंजूरी दिलवाई जाएगी।
“भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह ट्रेड डील वैश्विक व्यापार की दिशा बदल देगी। यह दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच आर्थिक एकीकरण का एक नया अध्याय है, जो लाखों लोगों के लिए समृद्धि लाएगा।” — पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री





