Monday, January 12, 2026

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‘राष्ट्र निर्माण में योगदान दे नई पीढ़ी, सेवा भाव को बनाए जीवन का लक्ष्य’: स्वामी अवधेशानंद गिरि का युवाओं को आह्वान

हरिद्वार/ऋषिकेश: प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु और जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने देश की युवा शक्ति से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को समझते हुए ‘सेवा भाव’ के साथ आगे आना चाहिए। स्वामी जी ने इस बात पर जोर दिया कि एक सशक्त और समृद्ध भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा चरित्रवान और संस्कारवान बनेगा।

सेवा भाव: जीवन का मूल मंत्र

स्वामी अवधेशानंद गिरि ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नहीं भूलना चाहिए:

  • निस्वार्थ सेवा: उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपने सामर्थ्य के अनुसार समाज के वंचित और निर्धन वर्ग की सहायता के लिए तत्पर रहें।
  • अध्यात्म और राष्ट्रवाद: स्वामी जी के अनुसार, राष्ट्र की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है और युवाओं को अपनी ऊर्जा का उपयोग देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में करना चाहिए।

चरित्र निर्माण और अनुशासन पर जोर

युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए उन्होंने अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अनिवार्य बताया:

  1. व्यसनों से मुक्ति: उन्होंने आह्वान किया कि युवा नशा और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रहें, क्योंकि एक स्वस्थ युवा ही एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
  2. शिक्षा और संस्कार: स्वामी जी ने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है, बल्कि वह ज्ञान जो मनुष्य को विनम्र और सेवाभावी बनाए, वही वास्तविक शिक्षा है।
  3. तकनीक का सकारात्मक उपयोग: उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि वे आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान प्रसार और सकारात्मक परिवर्तन के लिए करें।

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका

स्वामी जी ने विश्वास जताया कि भारत की युवा आबादी दुनिया में सबसे बड़ी है और यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।

  • वैश्विक नेतृत्व: उन्होंने कहा कि यदि भारत का युवा अपनी प्रतिभा को सेवा और नवाचार (Innovation) से जोड़ दे, तो भारत को पुन: ‘विश्व गुरु’ के पद पर प्रतिष्ठित होने से कोई नहीं रोक सकता।
  • सांस्कृतिक गौरव: उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत, योग और आयुर्वेद जैसे प्राचीन ज्ञान पर गर्व करने का आग्रह किया।

निष्कर्ष: सुदृढ़ संकल्प का समय

स्वामी अवधेशानंद गिरि का यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उनके अनुसार, युवाओं का सेवा भाव ही समाज में व्याप्त विषमता को दूर करने का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने अंत में कहा कि युवा अपने भीतर ‘स्वयं से पहले सेवा’ का संकल्प लें, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य देख सकें।

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