रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राज्य सरकार ने राजधानी रायपुर में बढ़ते अपराधों और शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुप्रतीक्षित पुलिस कमिश्नर प्रणाली को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था के तहत रायपुर को दो प्रमुख हिस्सों—शहर (City) और ग्रामीण (Rural)—में विभाजित किया गया है। कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद अब पुलिस को लाठीचार्ज, धारा 144 लागू करने और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई जैसे फैसलों के लिए जिला मजिस्ट्रेट (Collector) की अनुमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रायपुर अब इंदौर, भोपाल और देश के अन्य बड़े महानगरों की तर्ज पर आधुनिक पुलिसिंग की ओर कदम बढ़ा चुका है।
विभाजन की रूपरेखा: शहर बनाम गाँव
प्रशासनिक सुगमता के लिए रायपुर पुलिस को दो अलग-अलग कमानों में बांटा गया है:
- शहरी क्षेत्र (Urban Zone): रायपुर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख थाने और घनी आबादी वाले इलाके अब सीधे पुलिस कमिश्नर के नियंत्रण में होंगे। यहाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एडीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी।
- ग्रामीण क्षेत्र (Rural Zone): शहर के बाहरी इलाकों और गांवों को ग्रामीण जोन में रखा गया है। यहाँ की कमान पूर्व की भांति एसपी (ग्रामीण) के पास रह सकती है, जो कमिश्नर के निर्देशों पर कार्य करेंगे।
- थानों का पुनर्गठन: कई थानों की सीमाओं को बदला गया है ताकि रिस्पॉन्स टाइम (घटनास्थल पर पहुँचने का समय) को कम किया जा सके।
क्या-कुछ बदलेगा? नई प्रणाली के मुख्य प्रभाव
कमिश्नरी सिस्टम लागू होने से पुलिस की कार्यप्रणाली और आम जनता के अनुभवों में बड़े बदलाव आएंगे:
- मजिस्ट्रियल शक्तियां: अब तक गिरफ्तारी या बल प्रयोग के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती थी। अब पुलिस कमिश्नर और उनके अधीनस्थ अधिकारियों के पास ‘कार्यकारी मजिस्ट्रेट’ की शक्तियां होंगी, जिससे वे त्वरित निर्णय ले सकेंगे।
- लाइसेंसिंग अधिकार: हथियारों के लाइसेंस, लाउडस्पीकर की अनुमति और धरना-प्रदर्शन की परमिशन अब सीधे पुलिस मुख्यालय से मिल सकेगी, जिससे कलेक्ट्रेट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
- अपराध नियंत्रण: गुंडा एक्ट और जिला बदर जैसी कार्रवाइयां अब तेजी से होंगी, क्योंकि सुनवाई और आदेश देने का अधिकार अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के पास होगा।
- विशेषज्ञता (Specialization): अपराध जांच, यातायात प्रबंधन और इंटेलिजेंस के लिए अलग-अलग विंग्स बनाई जाएंगी, जिससे जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा।
आम नागरिक पर क्या असर पड़ेगा?
रायपुर के निवासियों के लिए यह व्यवस्था सुरक्षा के दृष्टिकोण से अधिक प्रभावी मानी जा रही है:
- त्वरित कार्रवाई: पुलिस के पास अधिक अधिकार होने से दंगों या तनावपूर्ण स्थितियों में फैसला लेने में देरी नहीं होगी।
- बेहतर ट्रैफिक: कमिश्नरी सिस्टम में ‘ट्रैफिक पुलिस’ के पास चालान और नियम बनाने की अधिक स्वायत्तता होगी, जिससे जाम की समस्या से निजात मिल सकती है।
- जवाबदेही: उच्च स्तर के अधिकारियों (ADG/IG रैंक के कमिश्नर) की सीधी निगरानी से पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी।
रायपुर में कमिश्नरी प्रणाली लागू होना इस बात का संकेत है कि सरकार राजधानी की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस अपनी मजिस्ट्रियल शक्तियों का उपयोग कितनी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करती है। यह बदलाव न केवल रायपुर की कानून-व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि इसे एक सुरक्षित ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने की दिशा में भी अहम साबित होगा।





