Wednesday, March 4, 2026

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रानीधारा में आतंक का पर्याय बना गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

अल्मोड़ा: रानीधारा और इसके आसपास के इलाकों में पिछले लंबे समय से दहशत का कारण बना गुलदार आखिरकार वन विभाग के बिछाए जाल में फंस गया है। गुलदार के पिंजरे में कैद होने की खबर मिलते ही स्थानीय निवासियों ने बड़ी राहत महसूस की है। यह गुलदार न केवल पालतू जानवरों को अपना निवाला बना रहा था, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में इसकी लगातार आवाजाही से इंसानों पर भी हमले का खतरा बना हुआ था।

वन विभाग की मुस्तैदी लाई रंग

क्षेत्र में गुलदार की सक्रियता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने वन विभाग से उसे पकड़ने की गुहार लगाई थी। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने रानीधारा के प्रभावित इलाके में पिंजरा लगाया था। बीती रात जैसे ही गुलदार शिकार के लालच में पिंजरे के भीतर दाखिल हुआ, वह कैद हो गया। सुबह जब ग्रामीणों ने पिंजरे के भीतर गुलदार को दहाड़ते हुए देखा, तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग की टीम को दी गई।

लंबे समय से था दहशत का माहौल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गुलदार के आतंक के कारण शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर थे। बच्चों को स्कूल भेजने और महिलाओं का घास-लकड़ी के लिए जंगल जाना दूभर हो गया था। गुलदार कई बार रिहायशी मकानों के आंगन तक पहुंच गया था, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ था।

गुलदार का स्वास्थ्य परीक्षण और आगे की कार्रवाई

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पकड़ा गया गुलदार पूरी तरह स्वस्थ लग रहा है। विभाग की टीम ने पिंजरे को अपने कब्जे में लेकर गुलदार को रेस्क्यू सेंटर भेज दिया है। वहां पशु चिकित्सकों द्वारा गुलदार का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार उसे सुरक्षित गहरे जंगल में छोड़ दिया जाएगा या चिड़ियाघर भेजने पर विचार किया जाएगा।

वन विभाग की अपील

गुलदार के पकड़े जाने पर वन क्षेत्राधिकारी ने ग्रामीणों को बधाई दी, लेकिन साथ ही सतर्क रहने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार की आवाजाही सामान्य प्रक्रिया है, इसलिए एहतियात के तौर पर रात के समय अकेले बाहर न निकलें और अपने घर के आसपास झाड़ियों की सफाई रखें।

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