जयपुर: राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था में एक सनसनीखेज फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। प्रदेश के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने विदेश से MBBS की डिग्री लेकर आए उन डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी जांच शुरू कर दी है, जिन्होंने भारत में प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) सर्टिफिकेट फर्जी तरीके से हासिल किया है। इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और हजारों संदिग्ध डॉक्टर जांच के दायरे में हैं।
कैसे हुआ इस बड़े घोटाले का खुलासा?
घोटाले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब SOG ने हाल ही में तीन ऐसे डॉक्टरों—पीयूष त्रिवेदी, देवेंद्र गुर्जर और शुभम गुर्जर—को गिरफ्तार किया, जिन्होंने विदेश (जॉर्जिया और अन्य देशों) से MBBS किया था। ये तीनों भारत में होने वाली अनिवार्य योग्यता परीक्षा (FMGE) में कई बार फेल हुए थे। इसके बावजूद, इन्होंने 16 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि देकर फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट और एनएमसी (NMC) रजिस्ट्रेशन बनवा लिया। इसी फर्जीवाड़े के दम पर ये आरोपी राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप तक कर रहे थे।
जांच की मुख्य बातें और कार्रवाई:
- 8,000 डॉक्टर रडार पर: SOG को मिले इनपुट्स और शिकायतों के आधार पर प्रदेश के करीब 8,000 डॉक्टर जांच के दायरे में हैं। इनमें कई ऐसे मशहूर डॉक्टर भी शामिल हैं जो चीन, रूस, किर्गिस्तान, जॉर्जिया और कजाकिस्तान जैसे देशों से डिग्री लेकर आए हैं।
- NBE से माँगा रिकॉर्ड: SOG ने दिल्ली स्थित नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) को पत्र लिखकर पिछले कुछ वर्षों के FMGE रिकॉर्ड मांगे हैं ताकि संदिग्ध डॉक्टरों के सर्टिफिकेट्स का मिलान किया जा सके।
- RMC की बड़ी कार्रवाई: राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाने वाले कई डॉक्टरों के लाइसेंस पहले ही रद्द कर दिए हैं।
- नेटवर्क की तलाश: पुलिस अब उस मास्टरमाइंड और दलालों के सिंडिकेट की तलाश कर रही है जो मोटी रकम लेकर रातों-रात फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर देते थे।
जनता की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़
अतिरिक्त महानिदेशक (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, यह सिर्फ एक प्रशासनिक फर्जीवाड़ा नहीं बल्कि आम जनता की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। बिना योग्यता परीक्षा पास किए ये डॉक्टर निजी और सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे थे। SOG ने एक WhatsApp नंबर भी जारी किया है जिस पर आम लोग ऐसे संदिग्ध डॉक्टरों की शिकायत कर सकते हैं।
“मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए अब दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को बेहद सख्त कर दिया गया है। बिना डिजिटल वेरिफिकेशन और रीयल-टाइम रिकॉर्ड चेक किए किसी को भी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जाएगी।” — राजस्थान चिकित्सा विभाग





