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रक्षा खरीद में देरी पर संसदीय समिति का कड़ा रुख: ‘डेडलाइन तय करें सरकार, वरना जंग के मैदान में बेकार हो जाएगी तकनीक’

नई दिल्ली (19 मार्च, 2026): देश की सुरक्षा तैयारियों और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर संसद की स्थायी समिति ने केंद्र सरकार को सख्त चेतावनी दी है। रक्षा खरीद (Defence Procurement) की प्रक्रियाओं में होने वाली अत्यधिक देरी पर नाराजगी जताते हुए समिति ने कहा है कि हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए एक अनिवार्य समयसीमा (Mandatory Deadline) तय की जानी चाहिए। समिति का तर्क है कि यदि खरीद प्रक्रिया में सालों लग जाते हैं, तो जिस आधुनिक तकनीक के लिए सौदा किया गया था, वह सेना के हाथ में आने तक ‘पुरानी’ (Outdated) हो जाती है।

संसदीय समिति की मुख्य चिंताएं: तकनीक की ‘एक्सपायरी डेट’

संसद में पेश की गई ताजा रिपोर्ट में समिति ने रक्षा मंत्रालय के सामने कई गंभीर बिंदु रखे हैं:

  • तकनीकी पिछड़ापन: समिति ने आगाह किया कि रक्षा क्षेत्र में तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है। यदि किसी लड़ाकू विमान या मिसाइल प्रणाली के सौदे में 5 से 10 साल की देरी होती है, तो युद्ध के मैदान में वह तकनीक दुश्मन के मुकाबले कमजोर पड़ सकती है।
  • लागत में वृद्धि: देरी के कारण न केवल सेना की क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि मुद्रास्फीति और विदेशी मुद्रा दरों में बदलाव के कारण रक्षा बजट पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
  • लालफीताशाही पर प्रहार: रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइलों के चक्कर और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स ‘कोल्ड स्टोरेज’ में चले जाते हैं।

समिति की प्रमुख सिफारिशें: जवाबदेही हो तय

रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने रक्षा मंत्रालय को अपनी कार्यशैली में सुधार के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  1. अनिवार्य समयसीमा: प्रत्येक रक्षा सौदे के लिए एक निश्चित समय सीमा तय हो। यदि उस अवधि में काम पूरा नहीं होता, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
  2. फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया: आपातकालीन स्थितियों और अत्यधिक महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए ‘फास्ट-ट्रैक’ खरीद प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
  3. स्वदेशीकरण को बढ़ावा: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू रक्षा कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए ताकि विदेशी कंपनियों के साथ होने वाली लंबी कानूनी और कूटनीतिक वार्ताओं से बचा जा सके।

रणनीतिक महत्व: सीमा पर बढ़ती चुनौतियां

समिति ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की भौगोलिक स्थिति और दो तरफा सीमाओं (Two-Front War) की चुनौतियों को देखते हुए सैन्य आधुनिकीकरण में एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती:

  • दुश्मन की तैयारी: रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि पड़ोसी देश अपनी सैन्य तकनीक को तेजी से अपग्रेड कर रहे हैं, ऐसे में भारत को अपनी खरीद प्रक्रिया की रफ्तार बढ़ानी होगी।

बजट का सही उपयोग: समिति ने मंत्रालय से यह भी कहा कि आवंटित बजट का समय पर और सही तकनीक पर उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि वित्त वर्ष के अंत में फंड लैप्स न हो।

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