लखनऊ/नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक टैरिफ समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने इस समझौते को भारतीय किसानों और लघु उद्योगपतियों के हितों के खिलाफ बताते हुए तंज कसा कि “यह कोई डील (समझौता) नहीं, बल्कि विदेशी ताकतों के आगे दी गई ढील है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वाशिंगटन के दबाव में आकर आयात शुल्क (टैरिफ) कम कर रही है, जिससे अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जाएंगे और स्थानीय किसानों की कमर टूट जाएगी।
अखिलेश यादव के प्रहार: मुख्य बिंदु
सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के माध्यम से सरकार की आर्थिक नीतियों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए:
- किसानों की अनदेखी: अखिलेश यादव ने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करती है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेब, अखरोट और अन्य उत्पादों पर आयात शुल्क घटाकर विदेशी किसानों को फायदा पहुंचा रही है।
- ‘मेक इन इंडिया’ पर सवाल: उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या विदेशी सामानों को सस्ता करके भारतीय उत्पादों को बाजार से बाहर करना ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली चेहरा है?
- विदेशी कंपनियों को ‘रेड कार्पेट’: सपा प्रमुख का आरोप है कि सरकार चुनावी चंदे और अंतरराष्ट्रीय छवि चमकाने के चक्कर में देश के छोटे व्यापारियों और किसानों का भविष्य दांव पर लगा रही है।
क्या है विवादित टैरिफ समझौता?
भारत और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते के तहत कुछ प्रमुख अमेरिकी उत्पादों पर से अतिरिक्त सीमा शुल्क (Customs Duty) हटाया या कम किया गया है:
- कृषि उत्पाद: इसमें मुख्य रूप से अमेरिकी सेब, बादाम, अखरोट और चने जैसे उत्पाद शामिल हैं।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) विवाद: यह समझौता उन विवादों को सुलझाने के क्रम में हुआ है जो पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच व्यापारिक खींचतान का कारण बने हुए थे।
- बाजार पहुंच: अमेरिका लंबे समय से भारत पर अपने डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के लिए बाजार खोलने का दबाव बना रहा था।
भाजपा का पलटवार: “यह वैश्विक कूटनीति की जीत”
विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसे भारत की कूटनीतिक जीत बताया है:
- द्विपक्षीय लाभ: सरकार का तर्क है कि टैरिफ कम करने के बदले अमेरिका भी भारतीय स्टील और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों के लिए अपने बाजार की बाधाएं कम कर रहा है।
- आर्थिक विकास: भाजपा का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ‘देने और लेने’ (Give and Take) की नीति चलती है और इस समझौते से अंततः उपभोक्ताओं को सस्ता सामान मिलेगा और व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे।





