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यूपी में देशद्रोहियों के बड़े गिरोह का भंडाफोड़: सुरक्षा ठिकानों की जानकारी विदेश भेजने वाले 6 आरोपी गिरफ्तार; मास्टरमाइंड ‘रोमिया’ भी धरा गया

कौशांबी/गाजियाबाद (14 मार्च, 2026): उत्तर प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए देश की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने वाले छह गद्दारों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा बलों के संवेदनशील ठिकानों की गोपनीय लोकेशन, वीडियो और तस्वीरें विदेश भेजने के नेटवर्क में शामिल थे। इस गिरोह का सरगना ‘हेड रोमिया’ भी पुलिस की गिरफ्त में आ गया है, जो इस पूरे ऑपरेशन का संचालन कर रहा था।

कौशांबी में चल रहा था जासूसी का ‘किराये का ठिकाना’

पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे:

  • किराये के मकान में ठिकाना: गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर, संभल, शाहजहांपुर और बदायूं जैसे जिलों के रहने वाले हैं। पुलिस से बचने के लिए ये सभी वर्तमान में कौशांबी क्षेत्र में एक किराये का मकान लेकर रह रहे थे।
  • दिल्ली-एनसीआर के ठिकानों पर नजर: आरोपियों का मुख्य काम दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के महत्वपूर्ण ठिकानों की रेकी करना था।
  • डिजिटल जासूसी: ये लोग प्रतिबंधित या संवेदनशील इलाकों की फोटो खींचते और वीडियो बनाते थे, जिन्हें बाद में एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए विदेश भेजा जाता था।

खुलासा: पैसे के लालच में बेची जा रही थी देश की सुरक्षा

पूछताछ के दौरान जासूसी के इस काले खेल के पीछे के मकसद का भी खुलासा हुआ है:

  1. विदेशी फंडिंग: पकड़े गए संदिग्धों ने कबूल किया है कि सुरक्षा बलों की लोकेशन और गोपनीय डेटा साझा करने के बदले उन्हें विदेशों से मोटी रकम मिल रही थी। यह पैसा हवाला या अन्य संदिग्ध माध्यमों से उन तक पहुंचाया जा रहा था।
  2. मास्टरमाइंड रोमिया की भूमिका: गिरोह का मुख्य सरगना ‘हेड रोमिया’ विदेशी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था। वही तय करता था कि किस ठिकाने की रेकी करनी है और डेटा किसे भेजना है।
  3. मसूरी से कौशांबी तक फैला जाल: हाल ही में गाजियाबाद के मसूरी थाना पुलिस ने भी इसी तरह की संदिग्ध गतिविधियों का इनपुट दिया था, जिसके बाद कौशांबी पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए इस गिरोह को दबोच लिया।

पुलिस और खुफिया एजेंसियों की अगली कार्रवाई

इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब इस मामले की तह तक जाने में जुट गई हैं:

  • मोबाइल और लैपटॉप की जांच: पुलिस ने आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की है।
  • विदेशी लिंक की तलाश: एजेंसियां अब उन विदेशी हैंडलर्स की पहचान करने में जुटी हैं, जिन्हें यह डेटा भेजा जा रहा था। यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इनके तार किसी आतंकी संगठन या दुश्मन देश की जासूसी एजेंसी से जुड़े हैं।

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