न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसके लिए स्थायी सदस्यता की मांग को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक समर्थन सामने आया है। इस मसले पर चीन और रूस ने स्पष्ट रूप से भारत का समर्थन किया है, जबकि भूटान ने भी भारत के स्थायी सदस्य बनने की वकालत की है। यह संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की जिम्मेदारियों और नेतृत्व की भूमिका को लेकर सहमति बन रही है।
चीन और रूस का रुख
यूएन महासभा के दौरान चीन और रूस के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत की आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक भूमिका विश्व स्तर पर बढ़ रही है। दोनों देशों ने भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और इसके महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का स्थायी सदस्य बनना वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए लाभकारी होगा।
भूटान का समर्थन
भूटान ने भी भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को जोर देकर समर्थन दिया। भूटान के प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दक्षिण एशिया और वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभर रहा है और उसके अनुभव और नेतृत्व की वजह से उसे स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत के वैश्विक मंच पर सक्रिय योगदान से छोटे देशों के हित भी सुरक्षित रह सकते हैं।
भारत की वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बढ़ती भूमिका केवल आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं है। भारत ने वैश्विक विकास, शांति, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके अलावा, भारत का बहुपक्षीय दृष्टिकोण और स्वतंत्र नीति इसे अन्य देशों के लिए भरोसेमंद साझेदार बनाती है।
स्थायी सदस्यता की महत्वता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता केवल कूटनीतिक स्थिति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह विश्व राजनीति में भारत की भूमिका, वैश्विक शांति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में निर्णायक योगदान देने की क्षमता को मान्यता देती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और रूस का समर्थन भारत की दावेदारी को और मजबूत बनाता है और इस दिशा में नए गठजोड़ और सहयोग को भी जन्म दे सकता है।





