Monday, March 9, 2026

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‘युद्ध समाधान नहीं, स्वयं एक समस्या है’: ईरानी दूतावास पहुंचे मुख्तार अब्बास नकवी, अयातुल्लाह खामेनेई को दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस दौरान उन्होंने न केवल दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के बीच शांति का संदेश भी दिया।

ईरानी राजदूत से मुलाकात और शोक संवेदना

सोमवार दोपहर मुख्तार अब्बास नकवी ईरानी एम्बेसी पहुंचे, जहाँ उन्होंने ईरान के राजदूत से मुलाकात की:

  • श्रद्धांजलि अर्पित की: नकवी ने दूतावास में रखी शोक पुस्तिका में अपनी संवेदनाएं दर्ज कीं और अयातुल्लाह खामेनेई को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
  • ईरानी जनता के प्रति सहानुभूति: उन्होंने इस दुख की घड़ी में ईरान के नागरिकों के प्रति भारत की ओर से सहानुभूति और एकजुटता व्यक्त की।

‘बुद्ध की धरती शांति की पक्षधर’: नकवी का शांति संदेश

दूतावास के बाहर मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए भाजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दोहराया और युद्ध की विभीषिका पर चिंता जताई:

  • शांति ही एकमात्र मार्ग: नकवी ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है और हम हमेशा से शांति के समर्थक रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक मंचों पर स्पष्ट किया है कि केवल शांति और संवाद के जरिए ही किसी भी जटिल समस्या का समाधान संभव है।
  • इंसानियत की रक्षा: उन्होंने कहा कि मानवता की सुरक्षा के लिए हिंसा का अंत होना अनिवार्य है।

सोशल मीडिया पर युद्ध की निंदा: ‘शांति का अमृत निकले’

मुलाकात के बाद मुख्तार अब्बास नकवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ईरानी राजदूत के साथ अपनी तस्वीरें साझा कीं और एक कड़ा संदेश लिखा:

“युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकता है, बल्कि यह स्वयं में एक बड़ी समस्या है। इंसानियत की सुरक्षा के लिए शांति अपरिहार्य है। मैं प्रार्थना करता हूं कि वर्तमान संकट के इस सागर से शांति का अमृत निकले।”

वैश्विक संदर्भ में दौरे का महत्व

9 मार्च 2026 की वर्तमान वैश्विक स्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच नकवी का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह भारत की उस कूटनीति का हिस्सा है जहाँ वह संघर्ष प्रभावित देशों के साथ मानवीय और कूटनीतिक संबंधों को संतुलित बनाए रखता है।

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