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युद्ध की विभीषिका से दूर, उत्तराखंड की वादियों में गूँजी अमन की दुआ: 120 इज़रायली नागरिकों ने कसारदेवी में मनाया पवित्र ‘पासओवर’ पर्व

अल्मोड़ा/कसारदेवी: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और अशांति के माहौल से कोसों दूर, देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में यहूदी समुदाय का पवित्र और ऐतिहासिक पर्व ‘पासओवर’ (पेसह) अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र कसारदेवी में, इज़राइल से पहुँचे लगभग 120 यहूदी नागरिकों ने एकत्र होकर अपने पूर्वजों की मिस्र की गुलामी से मुक्ति की स्मृति में यह एक सप्ताह लंबा चलने वाला त्योहार परंपरागत विधि-विधान के साथ शुरू किया। युद्ध की विभीषिका झेल रहे अपने वतन से दूर, इन नागरिकों के लिए यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि मानसिक शांति और अमन की दुआ माँगने का एक ज़रिया भी बन गया है।

कसारदेवी के रिज़ॉर्ट में हर्षोल्लास: ‘सेडर’ अनुष्ठान और हग्गादा का वाचन

बुधवार को कसारदेवी स्थित एक स्थानीय रिज़ॉर्ट में इज़रायली नागरिकों ने पेसह पर्व का भव्य आगाज़ किया। पर्व की शुरुआत ‘सेडर’ (Seder) नामक एक विशेष और अत्यंत महत्त्वपूर्ण अनुष्ठानिक भोजन से हुई, जिसमें सभी परिवार और समुदाय के सदस्य एक साथ बैठकर हिस्सा लेते हैं। इस दौरान, उन्होंने अपने पवित्र ग्रंथ ‘हग्गादा’ (Haggadah) के माध्यम से मिस्र की गुलामी से यहूदियों की मुक्ति की प्राचीन और प्रेरणादायक कथा का सामूहिक वाचन किया। सेडर प्लेट में रखे गए विभिन्न सांकेतिक खाद्य पदार्थ गुलामी के दिनों के कष्टों और स्वतंत्रता के सुखद अनुभव को दर्शाते हैं, जिन्हें श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया गया।

परंपरागत विधि-विधान और कड़े नियम: ‘कोशर फॉर पासओवर’ और चार प्याले

सात से आठ दिन तक चलने वाले इस पवित्र पर्व के दौरान यहूदी समुदाय के लोग कड़े धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। इज़रायली नागरिकों ने बताया कि वे इस पूरी अवधि में केवल ‘कोशर फॉर पासओवर’ (Kosher for Passover) भोजन ही ग्रहण करते हैं, जिसका अर्थ है बिना खमीर वाली रोटी (अजीम) और विशेष रूप से तैयार किया गया शुद्ध भोजन। इसके अलावा, सेडर अनुष्ठान के दौरान चार प्याले अंगूर के रस या मदिरा पीने की प्राचीन परंपरा भी निभाई जाती है, जो मुक्ति के विभिन्न चरणों का प्रतीक है। इज़रायली नागरिक इस दौरान नियमित प्रार्थनाएँ करते हैं और अपने वतन में शांति बहाली की कामना करते हैं।

पर्यटन व्यवसाय को संबल और सांस्कृतिक आदान-प्रदान: स्थानीय लोगों का स्वागत

युद्ध के कारण इज़राइल से पर्यटकों की आवक कम होने की आशंकाओं के बीच, कसारदेवी में इतनी बड़ी संख्या में इज़रायली नागरिकों का पहुँचना स्थानीय पर्यटन व्यवसाय के लिए एक सकारात्मक संकेत है। स्थानीय रिज़ॉर्ट मालिकों और व्यापारियों ने इज़रायली मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया है और उनके पर्व को सफल बनाने में सहयोग दे रहे हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि भारतीय और इज़रायली संस्कृतियों के बीच आदान-प्रदान का एक माध्यम भी बन गया है। इज़रायली नागरिकों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और यहाँ के लोगों के आतिथ्य सत्कार की सराहना की है।

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