अमेरिका ने सोमवार को रूस के प्रतिनिधियों से वार्ता की, जिसमें एक आंशिक युद्धविराम पर सहमति बनाने की कोशिश की गई। इससे एक दिन पहले रविवार को अमेरिकी प्रतिनिधियों ने इसी मुद्दे पर यूक्रेन के अधिकारियों से चर्चा की थी। तीन साल से जारी यूक्रेन युद्ध में 30 दिन के अस्थायी युद्धविराम पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी,लेकिन अभी तक इस पर पूरी तरह अमल नहीं हो पाया है। दोनों देशों के बीच अब भी ड्रोन और मिसाइलों से हमले जारी हैं। युद्धविराम के लिए सबसे बड़ा विवाद यह है कि कौन-कौन से ठिकाने हमलों से सुरक्षित रहेंगे। अमेरिका का कहना है कि उर्जा और बुनियादी ढांचे को इस समझौते में शामिल किया जाना चाहिए, जबकि रूस केवल उर्जा सुविधाओं तक इसे सीमित रखना चाहता है। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का कहना है कि वह रेलवे और बंदरगाहों को भी इस सुरक्षा के दायरे में लाना चाहते हैं। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सोमवार को इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई, जिसमें काला सागर में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए हमले रोकने पर भी विचार किया गया। रूसी मीडिया ने देर रात बताया कि यह बातचीत समाप्त हो गई है। वहीं, व्हाइट हाउस में प्रेस से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वार्ता में क्षेत्रीय सीमाओं और यूक्रेन के दक्षिण में स्थित जापोरिझिया परमाणु संयंत्र के भविष्य पर भी चर्चा हुई। पिछले हफ्ते ट्रंप ने सुझाव दिया था कि अमेरिका को जापोरिझिया परमाणु संयंत्र का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेना चाहिए। यह दुनिया के सबसे बड़े परमाणु संयंत्रों में से एक है, जिसे रूस ने युद्ध की शुरुआत में ही अपने कब्जे में ले लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, कुछ लोग कह रहे हैं कि अमेरिका को इस संयंत्र का स्वामित्व लेना चाहिए, क्योंकि हमारे पास इसे सुचारू रूप से चलाने की विशेषज्ञता है।
रूस के कब्जे के बाद से इस संयंत्र की हालत बिगड़ती जा रही है। इसके सभी रिएक्टर बंद कर दिए गए हैं, लेकिन ठंडा रखने के लिए इसे अभी भी बिजली और कर्मचारियों की जरूरत है। यह संयंत्र यूक्रेनी बिजली ग्रिड से जुड़ा तो है, लेकिन कोई बिजली उत्पादन नहीं कर रहा।