तिरुवनंतपुरम/कोच्चि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के अपने हालिया दौरे के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए सबरीमाला मंदिर से जुड़े विवादों और वहाँ हुई कथित अनियमितताओं पर बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री ने केरल की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि सबरीमाला मंदिर की परंपराओं और श्रद्धा के साथ हुए खिलवाड़ की गहन जाँच की जाएगी। उन्होंने इस वादे को ‘मोदी की गारंटी’ बताते हुए विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार किया।
श्रद्धा और परंपराओं का सम्मान सर्वोपरि
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सबरीमाला केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों और राज्य सरकार ने मंदिर की पवित्रता और भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार हमेशा से ही धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के पक्ष में रही है और भविष्य में भी श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
जाँच का वादा और विपक्ष पर निशाना
प्रधानमंत्री ने राज्य में सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन (UDF) पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों ने केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए सबरीमाला के मुद्दे का इस्तेमाल किया है।
- भ्रष्टाचार की जाँच: पीएम ने वादा किया कि मंदिर के प्रबंधन और पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुई घटनाओं में यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
- भक्तों को न्याय: उन्होंने कहा कि सबरीमाला के भक्तों के खिलाफ दर्ज किए गए ‘झूठे’ मुकदमों और उन पर हुए अत्याचारों की निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी।
‘मोदी की गारंटी’ का संदेश
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने बार-बार ‘मोदी की गारंटी’ शब्द का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केरल की जनता अब बदलाव चाहती है और वे यह सुनिश्चित करेंगे कि विकास के साथ-साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित रहे। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे उन शक्तियों को पहचानें जो धर्म और आस्था के नाम पर समाज को बांटने का काम करती हैं।
केरल में राजनीतिक सरगर्मी तेज
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद केरल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सबरीमाला का मुद्दा उठाकर भाजपा ने आगामी चुनावों से पहले हिंदू मतदाताओं और श्रद्धालुओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है। जहाँ भाजपा कार्यकर्ता इस बयान को ऐतिहासिक बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे चुनावी स्टंट करार दे रहे हैं।





