Sunday, February 8, 2026

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‘यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान’: नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन पर गदगद हुए डोनाल्ड ट्रंप; वेनेजुएला की नेता मचाडो ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुझाया नाम

फ्लोरिडा/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें वर्ष 2026 के ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ के लिए नामांकित किए जाने पर खुशी और आभार व्यक्त किया है। वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो द्वारा किए गए इस नामांकन पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने इसे अपने लिए एक “असाधारण सम्मान” बताया। ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह नामांकन उनके कार्यकाल के दौरान विश्व शांति और विशेष रूप से लैटिन अमेरिका में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रयासों की वैश्विक मान्यता है। मचाडो ने ट्रंप के नाम का प्रस्ताव देते हुए तर्क दिया है कि वेनेजुएला में तानाशाही के खिलाफ और स्वतंत्रता की बहाली के लिए ट्रंप द्वारा उठाए गए कड़े कदमों ने लाखों लोगों को उम्मीद दी है।

मारिया कोरिना मचाडो ने क्यों चुना ट्रंप का नाम?

वेनेजुएला की लौह महिला मानी जाने वाली मचाडो ने इस नामांकन के पीछे कई रणनीतिक और मानवीय कारण बताए हैं:

  • तानाशाही के खिलाफ कड़ा रुख: मचाडो के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने निकोलस मादुरो के शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने और मानवीय सहायता सुनिश्चित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
  • लोकतंत्र का समर्थन: उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीतियों ने न केवल वेनेजुएला, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एक नई चेतना जागृत की है।
  • अब्राहम एकॉर्ड्स का जिक्र: नामांकन पत्र में ट्रंप के कार्यकाल के दौरान हुए ‘अब्राहम एकॉर्ड्स’ (इजरायल और अरब देशों के बीच शांति समझौता) का भी उल्लेख किया गया है, जिसे मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और ‘शांति दूत’ की छवि

ट्रंप ने इस मौके का इस्तेमाल अपनी विदेश नीति की सफलताओं को गिनाने के लिए किया:

  1. ‘नो वॉर’ प्रेसिडेंसी: ट्रंप ने अक्सर इस बात पर जोर दिया है कि उनके चार साल के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं की, जो कि पिछले कई दशकों के अमेरिकी इतिहास में एक दुर्लभ उदाहरण है।
  2. ऐतिहासिक नामांकन: यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप का नाम नोबेल के लिए आया है, लेकिन मचाडो जैसी एक प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय नेता द्वारा नाम सुझाए जाने से इस बार उनकी दावेदारी को अधिक वजन मिल रहा है।
  3. समर्थकों में उत्साह: ट्रंप के समर्थकों ने इस नामांकन को उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ विजन की नैतिक जीत बताया है।

नोबेल चयन प्रक्रिया और आगे की राह

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन मिलने का मतलब यह नहीं है कि पुरस्कार तय हो गया है, बल्कि यह एक लंबी प्रक्रिया की शुरुआत है:

  • नामांकन की समय सीमा: नोबेल समिति हर साल जनवरी तक दुनिया भर के योग्य व्यक्तियों और संस्थाओं से नामांकन प्राप्त करती है।
  • अंतिम चयन: नॉर्वेजियन नोबेल समिति इन हजारों नामांकनों में से एक संक्षिप्त सूची तैयार करती है और अक्टूबर में विजेता के नाम की घोषणा की जाती है।
  • चुनौतियां: डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर दुनिया भर में मतभेद रहे हैं, ऐसे में नोबेल समिति के लिए 

मारिया कोरिना मचाडो द्वारा ट्रंप का नामांकन करना एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश भी है। यह दर्शाता है कि वेनेजुएला के लोकतांत्रिक आंदोलन को अभी भी अमेरिका के दक्षिणपंथी नेतृत्व से बड़ी उम्मीदें हैं। जहां ट्रंप इस नामांकन को अपनी चुनावी और अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि शांति का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार देने वाली समिति इस नामांकन को किस नजरिए से देखती है।

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